ASHA Worker Salary 2026: राज्य-वार तय मानदेय + काम का इंसेंटिव

आशा (ASHA) कार्यकर्ता सरकारी कर्मचारी नहीं, “स्वयंसेवी” हैं, इसलिए उन्हें वेतन नहीं बल्कि दो तरह का पैसा मिलता है: (1) राज्य/केंद्र का तय मासिक मानदेय या इंसेंटिव, और (2) हर काम (संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, TB मरीज़ आदि) पर NHM का अलग इंसेंटिव। तय रकम राज्य से राज्य बहुत अलग है: पश्चिम बंगाल ₹11,250* (1 अगस्त 2026 से), दिल्ली ₹6,000* (सितंबर 2026 में दोगुना), बिहार ₹3,000*। टूल में राज्य चुनें और पिछले महीने का काम-आधारित इंसेंटिव भरें।

आशा वर्कर सैलरी कैलकुलेटर

राज्य चुनें और पिछले महीने का काम-आधारित इंसेंटिव भरें।

मुफ़्त टूल। * = गाइड/ख़बर से लिया आँकड़ा, बदल सकता है। इनकम टैक्स नहीं जोड़ा। 27 अक्टूबर 2026 को जाँचे।

आशा वर्कर सैलरी: पद/राज्य अनुसार शुरुआती सैलरी

पदतय मानदेयDAमहीनाNPS (10%)हाथ में*
पश्चिम बंगाल: तय मानदेय ₹11,250* (1 अगस्त 2026 से)₹11,250—₹11,250—₹11,250
दिल्ली: तय इंसेंटिव ₹6,000* (सितंबर 2026)₹6,000—₹6,000—₹6,000
बिहार: तय मानदेय ₹3,000*₹3,000—₹3,000—₹3,000
केंद्र (NHM) रूटीन इंसेंटिव ₹3,500*₹3,500—₹3,500—₹3,500

* हाथ में = तय मानदेय + DA, NPS (जहाँ लागू) घटाकर, HRA और दूसरे भत्ते जोड़े बिना और इनकम टैक्स से पहले। HRA/भत्ते पता हों तो टूल में भरें।

काम के हिसाब से इंसेंटिव के उदाहरण*

  • संस्थागत प्रसव के लिए गर्भवती को ले जाना (JSY): ग्रामीण ₹600 तक*
  • पूरा टीकाकरण, परिवार नियोजन, TB/कुष्ठ मरीज़ की दवा पूरी कराना: अलग-अलग रकम*
  • असल रकम आपके ब्लॉक के ASHA भुगतान रजिस्टर/PFMS से देखें।

ध्यान दें

  • सभी रकमें ख़बरों/राज्य घोषणाओं से हैं*; केंद्र का ₹3,500 रूटीन इंसेंटिव राज्य की रकम में शामिल है या अलग, यह राज्य पर निर्भर*।
  • आशा फ़ैसिलिटेटर/संगिनी का मानदेय अलग होता है।

आशा कैसे बनें और काम क्या है

  • चयन: गाँव की ही विवाहित, विधवा या तलाक़शुदा महिला, उम्र आम तौर पर 25-45 साल, कम से कम 8वीं/10वीं पास (राज्य अनुसार)*। चयन ग्राम सभा/ग्राम स्वास्थ्य समिति और ब्लॉक स्तर पर होता है, कोई परीक्षा नहीं।
  • काम: गर्भवती महिला का रजिस्ट्रेशन और अस्पताल में प्रसव करवाना, बच्चों का टीकाकरण, TB/कुष्ठ मरीज़ की दवा, परिवार नियोजन की सलाह और गाँव का स्वास्थ्य सर्वे।
  • इंसेंटिव कैसे बढ़ता है: हर पूरा काम (जैसे संस्थागत प्रसव, पूरा टीकाकरण, TB इलाज पूरा) अलग पैसा देता है, इसलिए एक ही राज्य में दो आशा की कमाई अलग होती है। भुगतान आशा पोर्टल/PFMS से सीधे खाते में आता है*।
  • प्रोत्साहन: 10 साल की सेवा के बाद कुछ राज्यों में आशा संगिनी/फ़ैसिलिटेटर बनने का मौक़ा, और ANM कोर्स में आरक्षण/प्राथमिकता*।
  • ध्यान दें: आशा पर इनकम टैक्स की सीमा आम तौर पर नहीं पहुँचती, पर PM जीवन ज्योति/सुरक्षा बीमा जैसी योजनाओं में उनका प्रीमियम सरकार भरती है*; ब्लॉक से पूछकर नामांकन करवा लें।

महीने की कमाई का उदाहरण

  • किसके लिए सही: गाँव की महिलाएँ, जो अपने गाँव में रहकर सेहत का काम करना चाहती हैं और आगे ANM कोर्स की ओर बढ़ना चाहती हैं।
  • आम ग़लतफ़हमी: आशा को सरकारी कर्मचारी समझा जाता है; वे स्वयंसेवी हैं, इसलिए DA, पेंशन या ट्रांसफ़र के नियम लागू नहीं, पर राज्य मानदेय समय-समय पर बढ़ाते हैं।
  • पैसा देर से आए तो: ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइज़र (BCM) या आशा फ़ैसिलिटेटर से पोर्टल पर भुगतान की स्थिति पूछें; ज़्यादातर देरी काम की एंट्री अधूरी होने से होती है।

आशा वर्कर सैलरी: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आशा वर्कर को महीने में कितना पैसा मिलता है? तय रकम (राज्य अनुसार ₹3,000 से ₹11,250*) + काम के हिसाब से इंसेंटिव, जो हर महीने बदलता है।

क्या आशा वर्कर को पेंशन मिलती है? आम तौर पर नहीं; कुछ राज्य रिटायरमेंट पर एकमुश्त राशि देते हैं*।

स्रोत (27 अक्टूबर 2026 को जाँचे): पश्चिम बंगाल: राज्य मेमोरेंडम (जुलाई 2026, ख़बरें*); दिल्ली: कैबिनेट फ़ैसला सितंबर 2026 (AIR न्यूज़*); बिहार ₹3,000 (2025 घोषणा, ख़बरें*); NHM रूटीन इंसेंटिव ₹3,500 (ख़बरें*)। आधिकारिक आदेश की कॉपी क्लाउड से नहीं खुली।

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