नेट मीटरिंग में आपकी छत का सोलर जो बिजली बनाता है, वह पहले घर में इस्तेमाल होती है, और ज़्यादा बनी बिजली ग्रिड में चली जाती है; मीटर दोनों तरफ़ गिनता है और बिल सिर्फ़ “ली गई − भेजी गई” यूनिट का बनता है। जैसे 3 kW सोलर महीने में करीब 360 यूनिट बनाता है। ₹7/यूनिट रेट और 300 यूनिट खपत पर बिल करीब ₹2,280 महीना घटता है, और PM सूर्य घर की ₹78,000 सब्सिडी के बाद ₹1,02,000 का ख़र्च करीब 3.7 साल में वसूल हो जाता है। कुछ राज्यों में “नेट बिलिंग” है, जहाँ भेजी गई यूनिट कम रेट पर गिनी जाती है; टूल में वह भी चुन सकते हैं।
नेट मीटरिंग कैलकुलेटर
kW, महीने की खपत और बिजली रेट भरें; बाक़ी डिफ़ॉल्ट से चलेगा।
मुफ़्त टूल, आपका कोई डेटा सेव या भेजा नहीं जाता। 27 अक्टूबर 2026 को बनाया/जाँचा; * वाली बातें माध्यमिक स्रोतों से।
नेट मीटरिंग, नेट बिलिंग और ग्रॉस मीटरिंग
| व्यवस्था | कैसे गिनते हैं | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| नेट मीटरिंग | भेजी यूनिट, ली यूनिट से सीधे घटती है (1:1); साल के आख़िर में बची यूनिट कम रेट पर | घर, जहाँ दिन में खपत कम |
| नेट बिलिंग | ली यूनिट पूरे रेट पर, भेजी यूनिट तय कम रेट पर | जहाँ दिन में ज़्यादा खपत हो |
| ग्रॉस मीटरिंग | सारी बिजली ग्रिड को एक तय रेट पर, घर पूरी बिजली ख़रीदता है | बड़े सिस्टम/निवेश |
कितने kW का सोलर लगाएँ
| महीने की खपत | सुझाया साइज़ | PM सूर्य घर सब्सिडी |
|---|---|---|
| 150 यूनिट तक | 1-2 kW | ₹30,000-₹60,000 |
| 150-300 यूनिट | 2-3 kW | ₹60,000-₹78,000 |
| 300 से ज़्यादा | 3 kW+ | ₹78,000 (इससे ज़्यादा नहीं) |
1 kW सोलर भारत में औसतन 4 यूनिट रोज़ (करीब 120 यूनिट महीना) बनाता है; राजस्थान/गुजरात में ज़्यादा, पहाड़/पूर्वोत्तर और बरसात में कम। साइज़ अपनी खपत से बहुत बड़ा न रखें, क्योंकि ज़्यादा भेजी यूनिट का पैसा कम रेट पर मिलता है।
नेट मीटर कैसे लगवाएँ
- PM सूर्य घर पोर्टल (pmsuryaghar.gov.in) पर बिजली कनेक्शन नंबर से रजिस्टर करें; नेट मीटरिंग आवेदन वहीं से डिस्कॉम को जाता है।
- डिस्कॉम की तकनीकी मंज़ूरी के बाद रजिस्टर्ड वेंडर से सोलर लगवाएँ।
- डिस्कॉम नेट मीटर (बाय-डायरेक्शनल) लगाता है और निरीक्षण करता है; मीटर की फ़ीस राज्य के हिसाब से।
- कमीशनिंग रिपोर्ट के बाद सब्सिडी 30 दिन के अंदर बैंक खाते में*।
सब्सिडी कितनी और कब आएगी, यह PM सूर्य घर सब्सिडी कैलकुलेटर पर देखें।
नेट मीटरिंग कैलकुलेटर: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नेट मीटरिंग क्या होती है? ऐसा मीटर जो ग्रिड से ली और ग्रिड को भेजी दोनों बिजली गिनता है; बिल सिर्फ़ फ़र्क़ का बनता है। ज़्यादा भेजी यूनिट आगे के बिलों में घटती है।
3 kW सोलर से बिजली बिल कितना कम होगा? 3 kW करीब 360 यूनिट महीना बनाता है; 300 यूनिट खपत और ₹7 रेट पर बिल का एनर्जी चार्ज लगभग ख़त्म, बचत करीब ₹2,300 महीना। फ़िक्स्ड चार्ज फिर भी देना होता है।
ज़्यादा भेजी बिजली का पैसा मिलता है? हाँ, पर कम रेट पर: ज़्यादातर राज्यों में साल के आख़िर (सेटलमेंट) में ₹2-4 प्रति यूनिट के आसपास*; अपने डिस्कॉम का फ़ीड-इन टैरिफ़ देखें।
नेट मीटर लगवाने का ख़र्च कितना? राज्य पर निर्भर: मीटर और टेस्टिंग फ़ीस आम तौर पर कुछ हज़ार रुपये*; PM सूर्य घर में कई डिस्कॉम यह मुफ़्त/कम कर रहे हैं।
रात में बिजली कहाँ से आएगी? ग्रिड से। नेट मीटरिंग में बैटरी की ज़रूरत नहीं; दिन में भेजी यूनिट रात की ली यूनिट से घट जाती है।
स्रोत (27 अक्टूबर 2026 को जाँचे): PM सूर्य घर: मुफ़्त बिजली योजना (MNRE) की केंद्रीय सब्सिडी (₹30,000/kW पहले 2 kW, तीसरे kW पर ₹18,000, अधिकतम ₹78,000) और 1 kW ≈ 120 यूनिट/माह का अनुमान, जैसा हमारे सब्सिडी पेज पर; नेट मीटरिंग/नेट बिलिंग की परिभाषा: CEA/राज्य विद्युत नियामक आयोगों के रूफ़टॉप नियम। एक्सपोर्ट रेट और ख़र्च राज्य/वेंडर के हिसाब से अलग*। 25 साल की बचत में 10% गिरावट मानी है।
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