बारिश, बाढ़, सूखा, ओले या दूसरी प्राकृतिक आपदा से 33% या ज़्यादा फसल ख़राब होने पर केंद्र के SDRF नियमों से सिंचित फसल पर ₹17,000, असिंचित पर ₹8,500 और बाग़/बारहमासी फसल पर ₹22,500 प्रति हेक्टेयर मुआवज़ा (इनपुट सब्सिडी) मिलता है, ज़्यादा से ज़्यादा 2 हेक्टेयर तक। यानी एक एकड़ सिंचित फसल पर करीब ₹6,880। यह पैसा फसल बीमा से अलग है। नीचे अपना मुआवज़ा देखें।
फसल नुकसान मुआवज़ा कैलकुलेटर
ज़मीन, फसल का प्रकार और नुकसान भरें। टूल बताएगा सरकारी आपदा राहत (SDRF) से कितना मुआवज़ा बन सकता है। कोई फ़ोन नंबर नहीं माँगा जाता।
मुफ़्त अनुमान, सरकारी फ़ैसला नहीं। नियम 14 अक्टूबर 2026 को जाँचे।
फसल नुकसान पर कितना मुआवज़ा मिलता है
| ज़मीन/फसल | प्रति हेक्टेयर | प्रति एकड़ (करीब) | कम से कम |
|---|---|---|---|
| असिंचित (बारानी) | ₹8,500 | ₹3,440 | ₹1,000 |
| सिंचित | ₹17,000 | ₹6,880 | ₹2,000 |
| बाग़ / बारहमासी | ₹22,500 | ₹9,105 | ₹2,500 |
- नुकसान कम से कम 33% होना चाहिए (सरकारी सर्वे में)।
- एक किसान को ज़्यादा से ज़्यादा 2 हेक्टेयर (करीब 5 एकड़) तक का पैसा।
- कई राज्य (जैसे बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र) अपनी तरफ़ से इसमें बढ़ोतरी या अलग पैकेज देते हैं।
- बटाईदार किसान के लिए नियम राज्य तय करता है।
मुआवज़ा कैसे मिलता है
- नुकसान की ख़बर दें: लेखपाल/पटवारी, ग्राम पंचायत या कृषि विभाग को तुरंत बताएँ।
- सर्वे (गिरदावरी): राजस्व और कृषि विभाग खेत का सर्वे करके नुकसान का प्रतिशत तय करते हैं। सर्वे की लिस्ट में अपना नाम ज़रूर देखें।
- आवेदन: कई राज्यों में ऑनलाइन पोर्टल खुलता है (जैसे बिहार का कृषि इनपुट अनुदान)। आधार, बैंक खाता, खतौनी/जमाबंदी और बुवाई की जानकारी चाहिए।
- पैसा: सीधे बैंक खाते में (DBT) आता है।
मुआवज़ा और फसल बीमा में फ़र्क
| आपदा राहत (SDRF) | फसल बीमा (PMFBY) | |
|---|---|---|
| किसको | सर्वे में 33%+ नुकसान वाले किसान | जिनका बीमा हुआ है |
| पैसा | तय दर, 2 हेक्टेयर तक | बीमा राशि के हिसाब से, नुकसान जितना |
| कैसे | सर्वे और राज्य का आवेदन | 72 घंटे में 14447 या Crop Insurance ऐप |
| दोनों मिल सकते हैं? | हाँ, दोनों अलग योजनाएँ हैं | हाँ |
फसल मुआवज़ा: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
फसल नुकसान का मुआवज़ा कितना मिलता है? केंद्र के SDRF नियमों से 33% या ज़्यादा नुकसान पर सिंचित फसल पर ₹17,000, असिंचित पर ₹8,500 और बारहमासी/बाग़ पर ₹22,500 प्रति हेक्टेयर, ज़्यादा से ज़्यादा 2 हेक्टेयर तक। राज्य इसमें अपनी तरफ़ से बढ़ा सकते हैं।
एक एकड़ फसल ख़राब होने पर कितना पैसा मिलेगा? एक एकड़ सिंचित फसल पर करीब ₹6,880, असिंचित पर करीब ₹3,440 और बाग़ पर करीब ₹9,105, अगर नुकसान 33% या ज़्यादा है।
33% से कम नुकसान हो तो क्या मिलेगा? आपदा राहत (SDRF) से कुछ नहीं। फसल बीमा कराया है तो बीमा कंपनी के सर्वे के हिसाब से क्लेम बन सकता है।
फसल नुकसान का मुआवज़ा कहाँ आवेदन करें? लेखपाल/पटवारी या कृषि विभाग को नुकसान बताएँ और सर्वे में नाम लिखवाएँ। जिन राज्यों में ऑनलाइन पोर्टल खुलता है, वहाँ आधार, बैंक खाते और ज़मीन के कागज़ से आवेदन करें।
क्या फसल बीमा और मुआवज़ा दोनों मिल सकते हैं? हाँ। SDRF की इनपुट सब्सिडी और PMFBY का क्लेम अलग योजनाएँ हैं।
5 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन हो तो? SDRF से मुआवज़ा ज़्यादा से ज़्यादा 2 हेक्टेयर (करीब 4.94 एकड़) पर ही मिलता है। बाकी ज़मीन के लिए फसल बीमा ही सहारा है।
स्रोत (14 अक्टूबर 2026 को जाँचे): गृह मंत्रालय (MHA) की SDRF/NDRF सहायता की मदें और मानक, 2022-23 से 2025-26 (इनपुट सब्सिडी: बारानी ₹8,500, सिंचित ₹17,000, बारहमासी ₹22,500 प्रति हेक्टेयर; 33% नुकसान; 2 हेक्टेयर सीमा; न्यूनतम ₹1,000/₹2,000/₹2,500), राज्य आपदा प्रबंधन विभागों की प्रतियाँ। 16वें वित्त आयोग (2026-31) के नए मानक अभी हमें नहीं मिले; आने पर पेज अपडेट होगा। mha.gov.in हमारे सर्वर से नहीं खुला। यह अनुमान है, सरकारी फ़ैसला नहीं।
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