वसीयतनामा (Will) में आप लिखते हैं कि आपकी मौत के बाद आपकी संपत्ति किसे और कितनी मिलेगी। भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम (धारा 63) के अनुसार वसीयत लिखित हो, वसीयतकर्ता हस्ताक्षर करे और दो गवाह उसके सामने हस्ताक्षर करें। स्टांप पेपर की ज़रूरत नहीं, और रजिस्ट्री वैकल्पिक है, पर रजिस्टर्ड वसीयत पर विवाद कम होता है। आप जीवन में कभी भी वसीयत बदल सकते हैं; आख़िरी वसीयत मान्य होती है।
वसीयतनामा मेकर
ख़ाने भरें (* वाले ज़रूरी), भाषा चुनें और “बनाएँ” दबाएँ। फिर प्रिंट करें, PDF सेव करें या Word फ़ाइल लें।
मुफ़्त टूल। आपकी भरी जानकारी आपके ब्राउज़र में ही रहती है, कहीं भेजी या सेव नहीं होती। फ़ॉर्मेट सामान्य नमूना है; ज़रूरत हो तो संस्था के नियम के हिसाब से बदलें। 24 अक्टूबर 2026।
अच्छी वसीयत के लिए
- हर संपत्ति (मकान, ज़मीन, बैंक खाते, FD, शेयर, गहने) साफ़ पहचान के साथ लिखें: खसरा/मकान नं., खाता नं.।
- किसे क्या मिलेगा, हिस्सा साफ़ लिखें; “बाकी सारी संपत्ति” वाली लाइन ज़रूर जोड़ें।
- गवाह ऐसे लें जिन्हें वसीयत से कुछ नहीं मिल रहा।
- वसीयतकर्ता स्वस्थ मन से लिख रहा है, इसका डॉक्टर का प्रमाण (बुज़ुर्गों के लिए) साथ रखें।
- सब-रजिस्ट्रार के यहाँ रजिस्ट्री या सीलबंद लिफ़ाफ़े में जमा करा सकते हैं (रजिस्ट्रेशन अधिनियम धारा 42)।
वसीयत न हो तो
बिना वसीयत के संपत्ति धर्म के उत्तराधिकार क़ानून (जैसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम) से बँटती है। देखें: वारिस प्रमाण पत्र।
भरा हुआ उदाहरण: दो बच्चों में मकान और बैंक जमा
मैं, कमला देवी, पत्नी स्व. श्री हरिशंकर पांडे, आयु 71 वर्ष, निवासी 22 तुलसी नगर, वाराणसी, पूरे होश-हवास में बिना किसी दबाव के अपनी आख़िरी वसीयत लिखती हूँ। इससे पहले की सभी वसीयतें रद्द मानी जाएँ।
1. मकान नं. 22, तुलसी नगर (रजिस्ट्री नं. ____) मेरे बेटे श्री अनुराग पांडे को मिलेगा।
2. SBI शाखा लंका में मेरी FD और बचत खाते की पूरी रकम मेरी बेटी श्रीमती रचना मिश्रा को मिलेगी।
3. मेरे गहने दोनों बच्चों में बराबर बँटेंगे। इस वसीयत का निष्पादक (एग्ज़ीक्यूटर) मेरे भतीजे श्री आलोक पांडे होंगे।
स्थान: वाराणसी, दिनांक ____ वसीयतकर्ता के हस्ताक्षर ____ गवाह (जिनके सामने हस्ताक्षर हुए): (1) ____ (2) ____
नाम, नंबर और जगहें उदाहरण के लिए हैं; अपनी जानकारी ऊपर के टूल में भरें।
वसीयत विवाद से कैसे बचे
- गवाह लाभार्थी न हों: जिन्हें वसीयत में कुछ मिल रहा है, उन्हें गवाह न बनाएँ; दो स्वतंत्र गवाह रखें।
- नॉमिनी और वसीयत: बैंक का नॉमिनी पैसा लेता है, पर क़ानूनी हक़ वसीयत/उत्तराधिकार से तय होता है; नॉमिनी और वसीयत एक जैसे रखें तो झगड़ा नहीं होता।
- डॉक्टर का प्रमाण: बुज़ुर्ग या बीमार व्यक्ति वसीयत लिखे तो उसी दिन डॉक्टर से “मानसिक रूप से स्वस्थ” होने का प्रमाण लेकर साथ रखें।
- प्रोबेट: मुंबई, कोलकाता, चेन्नई की सीमा में आने वाली कुछ वसीयतों पर कोर्ट से प्रोबेट ज़रूरी है*; बाक़ी जगह आम तौर पर नहीं।
वसीयतनामा (Will): अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या वसीयत स्टांप पेपर पर लिखना ज़रूरी है? नहीं, सादे काग़ज़ पर लिखी वसीयत भी मान्य है, अगर उस पर वसीयतकर्ता और दो गवाहों के हस्ताक्षर हों।
क्या वसीयत की रजिस्ट्री ज़रूरी है? नहीं, वैकल्पिक है; पर रजिस्टर्ड वसीयत को चुनौती देना मुश्किल होता है।
वसीयत के गवाह कौन हो सकते हैं? कोई भी बालिग, समझदार व्यक्ति; बेहतर है जिसे वसीयत से कुछ न मिल रहा हो।
पुश्तैनी (पैतृक) संपत्ति की वसीयत हो सकती है? सिर्फ़ अपने हिस्से की; पूरी पैतृक संपत्ति की वसीयत नहीं कर सकते*।
यह नमूना आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फ़ॉर्मेट और संबंधित क़ानून (रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908, संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925, भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 और राज्यों के स्टांप क़ानून) के आधार पर Parachar ने बनाया (26 अक्टूबर 2026)। यह क़ानूनी सलाह नहीं है; अचल संपत्ति वाले दस्तावेज़ के लिए वकील या रजिस्ट्री दफ़्तर से जाँच कराएँ।
और मुफ़्त टूल: सभी लेटर फ़ॉर्मेट · छुट्टी का आवेदन · मैरिज बायोडाटा · GST इनवॉइस · पासपोर्ट फ़ोटो · सभी टूल