GST Invoice Format: टैक्स इनवॉइस बनाएँ (CGST/SGST या IGST, HSN, PDF)

GST रजिस्टर्ड व्यापारी को हर बिक्री पर टैक्स इनवॉइस देना होता है। CGST नियम 46 के अनुसार इसमें विक्रेता का नाम-पता-GSTIN, 16 अक्षर तक का क्रमवार इनवॉइस नंबर, तारीख़, ख़रीदार का नाम-पता (और GSTIN अगर रजिस्टर्ड हो), HSN कोड, विवरण, मात्रा, टैक्सेबल मूल्य, टैक्स की दर और रकम (CGST/SGST या IGST), सप्लाई का स्थान, रिवर्स चार्ज और हस्ताक्षर ज़रूरी हैं। नीचे भरें; राज्य के अंदर की बिक्री में टूल टैक्स आधा-आधा CGST और SGST में बाँट देगा, दूसरे राज्य में IGST लगाएगा।

GST इनवॉइस मेकर

ख़ाने भरें (* वाले ज़रूरी), भाषा चुनें और “बनाएँ” दबाएँ। फिर प्रिंट करें, PDF सेव करें या Word फ़ाइल लें।

सामान / सेवा (जितनी लाइन चाहिए, भरें)

मुफ़्त टूल। आपकी भरी जानकारी आपके ब्राउज़र में ही रहती है, कहीं भेजी या सेव नहीं होती। फ़ॉर्मेट सामान्य नमूना है; ज़रूरत हो तो संस्था के नियम के हिसाब से बदलें। 24 अक्टूबर 2026।

CGST + SGST या IGST कब

  • विक्रेता और सप्लाई का स्थान एक ही राज्य में: CGST + SGST (जैसे 18% = 9% + 9%)।
  • दूसरे राज्य में सप्लाई: पूरा IGST (18%)।
  • HSN: टर्नओवर ₹5 करोड़ तक 4 अंक, उससे ऊपर 6 अंक (B2B)*; जाँचें GST e-invoice, HSN, e-way bill चेकर में।
  • ई-इनवॉइस की सीमा पार करने वाले कारोबार को IRP पोर्टल पर IRN वाला ई-इनवॉइस बनाना होता है; यह फ़ॉर्मेट उनके लिए काफ़ी नहीं।

GST इनवॉइस फ़ॉर्मेट: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

GST इनवॉइस में क्या-क्या ज़रूरी है? विक्रेता GSTIN, क्रमवार इनवॉइस नं., तारीख़, ख़रीदार विवरण, HSN, मात्रा, टैक्सेबल मूल्य, टैक्स दर व रकम, सप्लाई का स्थान, रिवर्स चार्ज और हस्ताक्षर (नियम 46)।

टैक्स इनवॉइस और बिल ऑफ़ सप्लाई में फ़र्क? कंपोज़िशन स्कीम वाले या टैक्स-फ़्री सामान बेचने वाले “बिल ऑफ़ सप्लाई” देते हैं, जिस पर GST नहीं लगता।

इनवॉइस नंबर कैसे रखें? हर वित्त वर्ष में क्रमवार, 16 अक्षर तक, जैसे INV/26-27/001; बीच में नंबर न छोड़ें।

स्रोत: CGST नियम 2017, नियम 46 (टैक्स इनवॉइस के ज़रूरी ख़ाने), IGST अधिनियम (अंतर-राज्य सप्लाई); HSN अंक सीमा CBIC अधिसूचना 78/2020*। 24 अक्टूबर 2026।

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