Partition Deed Format: बँटवारा नामा (पारिवारिक बँटवारा) हिंदी/English

बँटवारा नामा (Partition Deed) से परिवार के सदस्य अपनी साझा (संयुक्त) संपत्ति के अलग-अलग हिस्से आपसी सहमति से तय करते हैं, ताकि हर एक अपने हिस्से का अकेला मालिक बने। अचल संपत्ति का बँटवारा नामा रजिस्टर्ड होना चाहिए और उस पर राज्य के हिसाब से स्टांप ड्यूटी लगती है*। अगर बँटवारा पहले ही हो चुका है और सिर्फ़ उसका रिकॉर्ड बनाना है, तो “मेमोरेंडम ऑफ़ फ़ैमिली सेटलमेंट” बनता है, जिस पर नियम अलग हैं*।

बँटवारा नामा मेकर

ख़ाने भरें (* वाले ज़रूरी), भाषा चुनें और “बनाएँ” दबाएँ। फिर प्रिंट करें, PDF सेव करें या Word फ़ाइल लें।

मुफ़्त टूल। आपकी भरी जानकारी आपके ब्राउज़र में ही रहती है, कहीं भेजी या सेव नहीं होती। फ़ॉर्मेट सामान्य नमूना है; ज़रूरत हो तो संस्था के नियम के हिसाब से बदलें। 24 अक्टूबर 2026।

बँटवारा नामे में

  • सभी हिस्सेदारों के नाम और रिश्ता
  • संपत्ति कैसे मिली (उत्तराधिकार, साझा ख़रीद)
  • पूरी संपत्ति और हर हिस्से का साफ़ नाप-चौहद्दी, नक्शे के साथ हो तो बेहतर
  • सबकी सहमति और भविष्य में दावा न करने की बात
  • गवाह और सब-रजिस्ट्रार के यहाँ रजिस्ट्री

खेती की ज़मीन का बँटवारा कई राज्यों में तहसील/राजस्व अदालत से भी होता है (जैसे UP में धारा 116, राजस्व संहिता)*।

स्टांप ड्यूटी राज्य के हिसाब से अलग है: स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर और कितने का स्टांप पेपर लगेगा देखें।

भरा हुआ उदाहरण: तीन भाइयों में पुश्तैनी मकान और खेत

पक्षकार: (1) रामकिशोर, (2) श्यामकिशोर, (3) नंदकिशोर, तीनों पुत्र स्व. श्री बलदेव प्रसाद, निवासी ग्राम मझौली, ज़िला देवरिया।
संयुक्त संपत्ति: (क) ग्राम मझौली में खसरा नं. 211, रकबा 0.900 हेक्टेयर; (ख) पुश्तैनी मकान, क्षेत्रफल 2,400 वर्ग फ़ुट।
बँटवारा: रामकिशोर को खसरा 211 का पूर्वी भाग 0.300 हेक्टेयर + मकान का पूर्वी हिस्सा 800 वर्ग फ़ुट; श्यामकिशोर को बीच का 0.300 हेक्टेयर + मकान का बीच का हिस्सा; नंदकिशोर को पश्चिमी 0.300 हेक्टेयर + मकान का पश्चिमी हिस्सा। आँगन और रास्ता तीनों का साझा रहेगा।
मूल्य बराबर करने के लिए: मकान का पूर्वी हिस्सा सड़क से लगा होने के कारण रामकिशोर बाक़ी दोनों भाइयों को ₹50,000-₹50,000 देंगे (ओवल्टी रकम)।
गवाह: (1) ____ (2) ____ नक़्शा संलग्न, जिस पर तीनों के हस्ताक्षर हैं।

नाम, नंबर और जगहें उदाहरण के लिए हैं; अपनी जानकारी ऊपर के टूल में भरें।

बँटवारा नामे में ये बातें न छूटें

  • नक़्शा: हर हिस्से की चारों दिशाओं की सीमा (चौहद्दी) और नाप वाला नक़्शा लगाएँ; बाद के झगड़े ज़्यादातर सीमा पर होते हैं।
  • ओवल्टी रकम: किसी को बड़ा या क़ीमती हिस्सा मिले और वह बाक़ियों को पैसा दे, तो उस रकम पर स्टांप ड्यूटी का अलग नियम लग सकता है*; रजिस्ट्री दफ़्तर से पूछें।
  • बहनों का हिस्सा: 2005 के बाद बेटियाँ भी पैतृक संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार हैं; बहन हिस्सा छोड़ना चाहे तो अलग रिलीज़ डीड (हक़ त्याग) रजिस्टर्ड हो, दबाव में नहीं।
  • खेती की ज़मीन: रजिस्ट्री के बाद तहसील में नामांतरण (दाख़िल-ख़ारिज) करवाएँ; कई राज्यों में खेती की ज़मीन का बँटवारा राजस्व अदालत (जैसे UP में धारा 116) से भी होता है*।

बँटवारा नामा (Partition Deed): अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बँटवारा नामे की रजिस्ट्री ज़रूरी है? हाँ, अचल संपत्ति के बँटवारा नामे की रजिस्ट्री ज़रूरी है (रजिस्ट्रेशन अधिनियम धारा 17)।

बँटवारा नामे पर स्टांप ड्यूटी कितनी है? राज्य पर निर्भर; परिवार के बँटवारे पर कई राज्यों में कम दर या तय रकम*।

अगर कोई हिस्सेदार राज़ी न हो? तब आपसी बँटवारा नामा नहीं बनेगा; सिविल कोर्ट या राजस्व अदालत में बँटवारे का मुक़दमा करना होगा।

यह नमूना आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फ़ॉर्मेट और संबंधित क़ानून (रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908, संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925, भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 और राज्यों के स्टांप क़ानून) के आधार पर Parachar ने बनाया (26 अक्टूबर 2026)। यह क़ानूनी सलाह नहीं है; अचल संपत्ति वाले दस्तावेज़ के लिए वकील या रजिस्ट्री दफ़्तर से जाँच कराएँ।

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