FIR Application Format: FIR दर्ज कराने का प्रार्थना पत्र हिंदी/English

FIR आवेदन (तहरीर) वह लिखित सूचना है जो संज्ञेय अपराध होने पर थाना प्रभारी को दी जाती है, ताकि पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173 के तहत FIR दर्ज करे। इसमें घटना की तारीख़, समय, जगह, आरोपी, गवाह और नुक़सान साफ़ लिखें। FIR दर्ज होने के बाद उसकी कॉपी मुफ़्त लेना आपका हक़ है।

FIR आवेदन मेकर

ख़ाने भरें (* वाले ज़रूरी), भाषा चुनें और “बनाएँ” दबाएँ। फिर प्रिंट करें, PDF सेव करें या Word फ़ाइल लें।

मुफ़्त टूल। आपकी भरी जानकारी आपके ब्राउज़र में ही रहती है, कहीं भेजी या सेव नहीं होती। फ़ॉर्मेट सामान्य नमूना है; ज़रूरत हो तो संस्था के नियम के हिसाब से बदलें। 24 अक्टूबर 2026।

ज़रूरी बातें

  • संज्ञेय अपराध (चोरी, मारपीट, धोखाधड़ी आदि) में पुलिस को FIR दर्ज करनी होती है (BNSS धारा 173); मना करें तो पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित/डाक से शिकायत भेजें, फिर मजिस्ट्रेट के पास जा सकते हैं।
  • BNSS के तहत FIR कहीं भी (ज़ीरो FIR) और ई-माध्यम से भी दी जा सकती है; ई-FIR पर 3 दिन में हस्ताक्षर करने होते हैं।
  • FIR की कॉपी मुफ़्त मिलती है; ज़रूर लें।
  • मोबाइल/सामान खोने पर कई राज्यों में ऑनलाइन “लॉस्ट रिपोर्ट” बनती है; साइबर धोखाधड़ी पर तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in।
  • झूठी शिकायत देना अपराध है; सिर्फ़ सच्ची बातें लिखें।

छोटी शिकायत या गुम सामान के लिए: पुलिस शिकायत प्रार्थना पत्र।

भरा हुआ नमूना: ऑनलाइन धोखाधड़ी की तहरीर

सेवा में,
थाना प्रभारी महोदय,
थाना साइबर क्राइम / थाना नगर, ज़िला पटना

विषय: ऑनलाइन धोखाधड़ी से ₹48,500 निकाले जाने पर FIR दर्ज करने हेतु

महोदय,
मैं सुनीता देवी, पत्नी श्री अजय सिंह, निवासी कंकड़बाग, पटना, बताना चाहती हूँ कि दिनांक 20-10-2026 को दोपहर 2:10 बजे मोबाइल नंबर 70XXXXXX21 से फ़ोन आया। फ़ोन करने वाले ने ख़ुद को बैंक अधिकारी बताकर KYC अपडेट के नाम पर OTP माँगा। OTP बताने के बाद मेरे SBI खाते (आख़िरी 4 अंक 4321) से 3 बार में कुल ₹48,500 निकल गए। मैंने उसी दिन 2:45 बजे 1930 पर शिकायत की, जिसका पावती नंबर 3150XXXXXXX है।
अतः प्रार्थना है कि इस घटना पर BNSS धारा 173 के तहत FIR दर्ज कर कार्रवाई करें और मेरी रकम वापस दिलाने की कृपा करें।

संलग्न: बैंक स्टेटमेंट, कॉल का स्क्रीनशॉट, 1930 शिकायत की पावती
प्रार्थी: सुनीता देवी, मो. 94XXXXXX55

नाम, नंबर और जगहें उदाहरण के लिए हैं; अपनी जानकारी ऊपर के टूल में भरें।

FIR की तहरीर में ये बातें ज़रूरी

  • समय का क्रम: घटना, आपको कब पता चला, और आपने कब-कब क्या किया (1930, बैंक), यह घड़ी के समय के साथ लिखें; पुलिस और बैंक दोनों इसी से रकम रोकते हैं।
  • लेन-देन का विवरण: हर ट्रांज़ैक्शन की तारीख़, रकम और UTR/रेफ़रेंस नंबर स्टेटमेंट से लिखें; “कुछ पैसे कटे” जैसा अधूरा विवरण न दें।
  • FIR नंबर: FIR दर्ज होने पर उसका नंबर, धाराएँ और तारीख़ लिखी कॉपी लें; बाद में बैंक, बीमा और कोर्ट में यही चाहिए।
  • FIR न लिखी जाए तो: वही तहरीर रजिस्टर्ड डाक से SP को भेजें और रसीद रखें; इसके बाद मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन (BNSS धारा 175(3)) का रास्ता है।

FIR आवेदन फ़ॉर्मेट: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

FIR कौन दर्ज करा सकता है? पीड़ित, उसका रिश्तेदार, या घटना की जानकारी रखने वाला कोई भी व्यक्ति।

ज़ीरो FIR क्या है? किसी भी थाने में, इलाक़ा देखे बिना दर्ज FIR, जो बाद में सही थाने को भेजी जाती है (BNSS धारा 173)।

पुलिस FIR दर्ज न करे तो? SP को लिखित शिकायत भेजें; फिर मजिस्ट्रेट के पास BNSS धारा 175(3) के तहत आवेदन।

क्या ऑनलाइन FIR हो सकती है? हाँ, ई-FIR की सुविधा है; 3 दिन के अंदर थाने जाकर हस्ताक्षर करने होते हैं। कई राज्यों में चोरी/गुम की ऑनलाइन रिपोर्ट भी।

क़ानूनी आधार: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023, धारा 173 (FIR, ज़ीरो FIR, ई-FIR, मुफ़्त प्रति) और 175(3), 1 जुलाई 2024 से लागू। फ़ॉर्मेट Parachar ने बनाया (26 अक्टूबर 2026); यह क़ानूनी सलाह नहीं है।

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