थाने में शिकायत का प्रार्थना पत्र थाना प्रभारी (SHO) के नाम लिखा जाता है: इसमें घटना कब, कहाँ, कैसे हुई, आरोपी कौन है (अगर पता हो) और क्या नुक़सान हुआ, साफ़ लिखा होता है। पत्र की एक कॉपी पर थाने की मोहर लगवाकर (रिसीविंग) रखें।
पुलिस शिकायत पत्र मेकर
ख़ाने भरें (* वाले ज़रूरी), भाषा चुनें और “बनाएँ” दबाएँ। फिर प्रिंट करें, PDF सेव करें या Word फ़ाइल लें।
मुफ़्त टूल। आपकी भरी जानकारी आपके ब्राउज़र में ही रहती है, कहीं भेजी या सेव नहीं होती। फ़ॉर्मेट सामान्य नमूना है; ज़रूरत हो तो संस्था के नियम के हिसाब से बदलें। 24 अक्टूबर 2026।
ज़रूरी बातें
- संज्ञेय अपराध (चोरी, मारपीट, धोखाधड़ी आदि) में पुलिस को FIR दर्ज करनी होती है (BNSS धारा 173); मना करें तो पुलिस अधीक्षक (SP) को लिखित/डाक से शिकायत भेजें, फिर मजिस्ट्रेट के पास जा सकते हैं।
- BNSS के तहत FIR कहीं भी (ज़ीरो FIR) और ई-माध्यम से भी दी जा सकती है; ई-FIR पर 3 दिन में हस्ताक्षर करने होते हैं।
- FIR की कॉपी मुफ़्त मिलती है; ज़रूर लें।
- मोबाइल/सामान खोने पर कई राज्यों में ऑनलाइन “लॉस्ट रिपोर्ट” बनती है; साइबर धोखाधड़ी पर तुरंत 1930 या cybercrime.gov.in।
- झूठी शिकायत देना अपराध है; सिर्फ़ सच्ची बातें लिखें।
FIR के लिए अलग फ़ॉर्मेट: FIR आवेदन फ़ॉर्मेट। ATM/कार्ड खोने पर बैंक को भी तुरंत बताएँ: ATM कार्ड ब्लॉक आवेदन।
भरा हुआ नमूना: मोटरसाइकिल चोरी की शिकायत
सेवा में,
थाना प्रभारी महोदय,
थाना कोतवाली, ज़िला सीतापुर (उ.प्र.)
विषय: मोटरसाइकिल चोरी होने के संबंध में प्रार्थना पत्र
महोदय,
निवेदन है कि मैं राजेश कुमार पुत्र श्री रामपाल, निवासी मोहल्ला गणेशगंज, सीतापुर का निवासी हूँ। दिनांक 12-10-2026 को शाम लगभग 7:30 बजे मैंने अपनी मोटरसाइकिल (हीरो स्प्लेंडर, काला रंग, रजिस्ट्रेशन UP34 AB 1234, चेसिस नं. के आख़िरी 5 अंक 45678) सब्ज़ी मंडी गेट के पास खड़ी की थी। 8:00 बजे लौटा तो गाड़ी वहाँ नहीं थी। आसपास पूछने पर भी पता नहीं चला।
अतः श्रीमान से प्रार्थना है कि मेरी रिपोर्ट दर्ज कर मोटरसाइकिल बरामद करवाने की कृपा करें।
संलग्न: RC की कॉपी, बीमा पॉलिसी की कॉपी, आधार कॉपी
प्रार्थी: राजेश कुमार, मो. 98XXXXXX10, दिनांक 13-10-2026
नाम, नंबर और जगहें उदाहरण के लिए हैं; अपनी जानकारी ऊपर के टूल में भरें।
शिकायत में ये ग़लतियाँ न करें
- अंदाज़े वाली बातें: “शायद पड़ोसी ने चुराई” जैसा शक बिना आधार न लिखें; जो देखा, वही लिखें। शक हो तो कारण के साथ अलग लाइन में लिखें।
- गाड़ी/मोबाइल की पहचान: गाड़ी का रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर, मोबाइल का IMEI (बॉक्स या बिल पर) ज़रूर लिखें; बीमा क्लेम और बरामदगी दोनों इसी से होते हैं।
- मोबाइल खोने पर: थाने के अलावा CEIR पोर्टल (sancharsaathi.gov.in) पर IMEI ब्लॉक करवाएँ; मिलने पर वहीं से अनब्लॉक होता है।
- बीमा का समय: वाहन चोरी में बीमा कंपनी FIR की कॉपी और “अनट्रेस रिपोर्ट” माँगती है; FIR में देरी हो तो कंपनी देरी का कारण पूछती है, इसलिए 24 घंटे में शिकायत दें।
पुलिस शिकायत प्रार्थना पत्र: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पुलिस शिकायत किसे लिखें? जिस इलाक़े में घटना हुई, वहाँ के थाना प्रभारी (SHO) को।
पुलिस शिकायत न ले तो क्या करें? SP/पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत डाक से भेजें; फिर मजिस्ट्रेट के पास अर्ज़ी (BNSS धारा 175) दे सकते हैं।
शिकायत और FIR में क्या फ़र्क है? संज्ञेय अपराध की शिकायत पर पुलिस FIR दर्ज करती है; असंज्ञेय मामलों में NCR (असंज्ञेय रिपोर्ट) बनती है।
क़ानूनी आधार: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023, धारा 173 (FIR, ज़ीरो FIR, ई-FIR) और 175, 1 जुलाई 2024 से लागू। फ़ॉर्मेट Parachar ने बनाया (26 अक्टूबर 2026); यह क़ानूनी सलाह नहीं है।
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