चेक बाउंस होने पर सबसे ज़रूरी काम है 30 दिन के अंदर सही लिखा क़ानूनी नोटिस भेजना; यह छूटा तो धारा 138 का केस ही नहीं बनता। जैसे ₹50,000 का चेक 20 अक्टूबर 2026 को लौटा, तो नोटिस 19 नवंबर 2026 तक भेजना होगा; सामने वाले को नोटिस मिलने के 15 दिन में पैसे देने होंगे, और न दे तो अगले 1 महीने में कोर्ट में शिकायत। नीचे का जनरेटर आपकी जानकारी से पूरा नोटिस (हिंदी या English) बना देता है और हर आख़िरी तारीख़ बताता है। यही टूल उधार दी रकम, किराए के सिक्योरिटी डिपॉज़िट, बकाया सैलरी और ख़राब सामान/सेवा के पैसे वापस माँगने का नोटिस भी बनाता है।
लीगल नोटिस जनरेटर
नोटिस का प्रकार चुनें और जानकारी भरें: पूरा ड्राफ़्ट (हिंदी/English) और हर आख़िरी तारीख़ मिलेगी।
मुफ़्त टूल, आपका कोई डेटा सेव या भेजा नहीं जाता। यह क़ानूनी सलाह नहीं, ड्राफ़्ट है; भेजने से पहले तथ्य जाँचें। 28 अक्टूबर 2026 को बनाया/जाँचा; * वाली बातें बदल सकती हैं या माध्यमिक स्रोतों से हैं।
लीगल नोटिस कब और क्यों ज़रूरी है
| मामला | नोटिस ज़रूरी? | जवाब का समय | उसके बाद कहाँ जाएँ |
|---|---|---|---|
| चेक बाउंस | हाँ, क़ानूनन (धारा 138(b)); रिटर्न मेमो से 30 दिन में | 15 दिन (क़ानून में तय) | मजिस्ट्रेट कोर्ट, 15 दिन के बाद 1 महीने में (धारा 142) |
| उधार दिया पैसा | क़ानूनन ज़रूरी नहीं, पर कोर्ट में आपकी नीयत और माँग का सबूत | आम तौर पर 15 दिन | दीवानी वसूली केस; लिखित सबूत हो तो समरी सूट (CPC Order 37)*; समय-सीमा 3 साल* |
| किराए का डिपॉज़िट | ज़रूरी नहीं, पर पहले यही | 7-15 दिन | किराया प्राधिकरण/सिविल कोर्ट (राज्य के किराया क़ानून के हिसाब से)* |
| बकाया सैलरी / F&F | ज़रूरी नहीं; वेतन संहिता 2019 में 2 कार्यदिवस की सीमा | 7-15 दिन | श्रम विभाग में क्लेम (धारा 45), 3 साल में* |
| ख़राब सामान / सेवा | ज़रूरी नहीं, पर उपभोक्ता आयोग में काम आता है | 15 दिन | राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915, फिर e-Jagriti पर उपभोक्ता आयोग, 2 साल में |
| सरकार / सरकारी विभाग पर दीवानी केस | हाँ, CPC धारा 80 का नोटिस | 2 महीने | सिविल कोर्ट |
चेक बाउंस की 30-15-30 समय-रेखा
- 3 महीने: चेक अपनी तारीख़ से 3 महीने तक ही बैंक में जमा हो सकता है (RBI, 1 अप्रैल 2012 से)। इसके बाद का चेक बाउंस हो तो धारा 138 नहीं लगती।
- 30 दिन: बैंक का रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन के अंदर लिखित नोटिस भेजें। चेक वैधता के अंदर दोबारा जमा कर सकते हैं; हर नए रिटर्न मेमो से नई 30 दिन की गिनती, पर केस एक ही बार*।
- 15 दिन: सामने वाले को नोटिस मिलने के दिन से 15 दिन पैसे देने के लिए। नोटिस लेने से मना करे या घर बंद मिले तो भी “मिला हुआ” माना जाता है, अगर पता सही था।
- 1 महीना: 15 दिन ख़त्म होने के अगले दिन से 1 महीने में कोर्ट में शिकायत। देरी हो तो कोर्ट वजह देखकर माफ़ कर सकता है (धारा 142(1)(b) का परंतुक)।
- कौन-सा कोर्ट: जहाँ आपका (पाने वाले का) बैंक खाता है, उस इलाक़े का मजिस्ट्रेट कोर्ट (धारा 142(2))।
पूरे केस, सज़ा और कोर्ट में लगने वाले कागज़ों के लिए हमारा चेक बाउंस केस टाइमलाइन कैलकुलेटर देखें। यह पेज नोटिस बनाने पर है।
चेक बाउंस नोटिस में ये 7 बातें ज़रूर हों
| बात | क्यों ज़रूरी |
|---|---|
| चेक नंबर, तारीख़, रकम, बैंक | इन्हीं से चेक की पहचान; गलत हुई तो बचाव पक्ष नोटिस को गलत कहेगा |
| रिटर्न मेमो की तारीख़ और कारण | इसी से 30 दिन गिने जाते हैं |
| चेक किस देनदारी के लिए दिया | धारा 138 सिर्फ़ “क़ानूनी रूप से वसूलने योग्य क़र्ज़ या देनदारी” पर; तोहफ़े या उधार के बिना दिए चेक पर नहीं |
| सिर्फ़ चेक की रकम की माँग | नोटिस में चेक से अलग या ज़्यादा रकम (ब्याज, ख़र्च) को मुख्य माँग बनाने पर नोटिस कमज़ोर हो सकता है; अलग से लिखें* |
| 15 दिन में भुगतान की माँग | क़ानून में तय; इससे कम समय देना ग़लत |
| सही पता | चेक देने वाले का वही पता जो बैंक/लेन-देन में है; कंपनी हो तो कंपनी और उसके डायरेक्टर दोनों को |
| भेजने का सबूत | रजिस्टर्ड AD/स्पीड पोस्ट की रसीद और ट्रैकिंग प्रिंट; ईमेल/WhatsApp की कॉपी भी रखें |
सज़ा, जुर्माना और जल्दी समझौते का फ़ायदा
| प्रावधान | क्या है |
|---|---|
| धारा 138 | 2 साल तक की जेल या चेक की रकम के दोगुने तक जुर्माना, या दोनों |
| धारा 143A | केस चलते समय कोर्ट आरोपी से चेक की रकम का 20% तक अंतरिम मुआवज़ा 60 दिन में दिलवा सकता है |
| धारा 148 | सज़ा के ख़िलाफ़ अपील पर कम से कम 20% जमा |
| धारा 147 (समझौता) | किसी भी स्टेज पर समझौता हो सकता है; सुप्रीम कोर्ट (2025) के दिशानिर्देशों में जितनी देर से समझौता, उतना ज़्यादा ख़र्च (कॉस्ट) देना पड़ता है* |
उदाहरण: ₹50,000 के चेक पर ज़्यादा से ज़्यादा जुर्माना ₹1,00,000 और अंतरिम मुआवज़ा ₹10,000 तक। इसलिए ज़्यादातर मामलों में नोटिस मिलते ही या पहली पेशी पर समझौता हो जाता है।
बाक़ी नोटिस: उधार, डिपॉज़िट, सैलरी, ख़राब सामान
- उधार का पैसा: तारीख़, रकम, कैसे दी (बैंक ट्रांसफ़र/UPI का स्क्रीनशॉट सबसे मज़बूत सबूत), और लौटाने का वादा लिखें। नक़द ₹20,000 से ज़्यादा उधार देना/लेना आयकर क़ानून में मना है*, इसलिए बड़ी रकम बैंक से ही दें।
- सिक्योरिटी डिपॉज़िट: किराया समझौते की कॉपी, चाबी सौंपने की तारीख़, बिजली-पानी के आख़िरी बिल की रसीद लगाएँ। मकान मालिक मरम्मत के नाम पर कटौती करे तो उसकी लिस्ट माँगें।
- सैलरी / फ़ुल एंड फ़ाइनल: नियुक्ति पत्र, आख़िरी 3 सैलरी स्लिप, इस्तीफ़ा/रिलीविंग ईमेल रखें। ग्रेच्युटी बकाया हो तो ग्रेच्युटी कैलकुलेटर से रकम निकालें और नोटिस में जोड़ें।
- ख़राब सामान / सेवा: बिल, वारंटी, शिकायत नंबर और ईमेल लगाएँ। ₹5 लाख तक के मामले में उपभोक्ता आयोग की कोई फ़ीस नहीं; देखें कंज़्यूमर कोर्ट फ़ीस।
नोटिस आप ख़ुद भेज सकते हैं; वकील से भेजना ज़रूरी नहीं। वकील से भेजने पर आम तौर पर ₹1,000-₹5,000 फ़ीस लगती है*। केस करने से पहले अपने ज़िले के DLSA (ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण) से मुफ़्त क़ानूनी मदद भी मिल सकती है (महिलाएँ, SC/ST, ₹3 लाख तक सालाना आय वाले आदि*)।
लीगल नोटिस फ़ॉर्मेट: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चेक बाउंस का नोटिस कितने दिन में भेजना होता है? बैंक का रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिन के अंदर। चेक की तारीख़ से 3 महीने के अंदर चेक बैंक में जमा होना भी ज़रूरी है।
क्या लीगल नोटिस ख़ुद भेज सकते हैं? हाँ। नोटिस पर अपना नाम-पता लिखकर साइन करें और रजिस्टर्ड डाक A.D. या स्पीड पोस्ट से भेजें। वकील से भेजना ज़रूरी नहीं।
नोटिस मिलने के बाद सामने वाला क्या कर सकता है? चेक बाउंस में 15 दिन के अंदर पूरी रकम देकर केस से बच सकता है। नहीं दिया तो आप 1 महीने में कोर्ट में शिकायत कर सकते हैं।
व्हाट्सऐप या ईमेल से भेजा नोटिस मान्य है? कुछ हाई कोर्ट (जैसे इलाहाबाद हाई कोर्ट, 2024) ने ईमेल/WhatsApp से भेजा नोटिस मान्य माना है*, पर रजिस्टर्ड AD/स्पीड पोस्ट सबसे सुरक्षित है क्योंकि उससे नोटिस मिलने की तारीख़ साबित होती है। दोनों भेजें।
उधार के पैसे का नोटिस कितने साल तक भेज सकते हैं? उधार की वसूली का केस आम तौर पर देय तारीख़ से 3 साल में करना होता है*। बीच में सामने वाले ने लिखकर क़र्ज़ माना या कुछ पैसे लौटाए तो गिनती उस दिन से नए सिरे से।
नोटिस का जवाब न आए तो क्या करें? चेक बाउंस में 15 दिन बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट में शिकायत; बाक़ी मामलों में दीवानी केस, श्रम विभाग या उपभोक्ता आयोग। नोटिस और डाक रसीद की कॉपी केस के साथ लगती है।
स्रोत (28 अक्टूबर 2026 को जाँचे): परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 धारा 138, 142, 143A, 147, 148 (indiacode.nic.in); RBI सर्कुलर DPSS.CO.CHD.No.1832 (4 नवंबर 2011, चेक वैधता 3 महीने, 1 अप्रैल 2012 से); वेतन संहिता 2019 धारा 17(2), 45; उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019; CPC धारा 80; लिमिटेशन एक्ट 1963 (3 साल, धारा 18/19)*; सुप्रीम कोर्ट के 2025 के चेक बाउंस दिशानिर्देश और इलाहाबाद हाई कोर्ट 2024 (ईमेल/WhatsApp नोटिस) समाचार/कानूनी पोर्टल से*।
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