Sale Agreement Format: बिक्री इक़रारनामा (एग्रीमेंट टू सेल) हिंदी/English

एग्रीमेंट टू सेल (बिक्री इक़रारनामा / बयाना पत्र) वह समझौता है जिसमें विक्रेता तय कीमत पर संपत्ति बेचने और ख़रीदार ख़रीदने का वादा करता है, बयाना (एडवांस) दिया जाता है और रजिस्ट्री (सेल डीड) की आख़िरी तारीख़ तय होती है। इससे मालिकाना हक़ नहीं बदलता; वह रजिस्टर्ड सेल डीड से ही बदलता है। कई राज्यों में कब्ज़े के साथ एग्रीमेंट पर ज़्यादा स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री ज़रूरी है*।

सेल एग्रीमेंट मेकर

ख़ाने भरें (* वाले ज़रूरी), भाषा चुनें और “बनाएँ” दबाएँ। फिर प्रिंट करें, PDF सेव करें या Word फ़ाइल लें।

मुफ़्त टूल। आपकी भरी जानकारी आपके ब्राउज़र में ही रहती है, कहीं भेजी या सेव नहीं होती। फ़ॉर्मेट सामान्य नमूना है; ज़रूरत हो तो संस्था के नियम के हिसाब से बदलें। 24 अक्टूबर 2026।

इक़रारनामे में ज़रूर लिखें

  • संपत्ति का पूरा विवरण (खसरा/प्लॉट नं., रकबा, चौहद्दी)
  • कुल कीमत, बयाना और बाकी रकम कब और कैसे
  • रजिस्ट्री की आख़िरी तारीख़, और देरी होने पर क्या होगा (बयाना ज़ब्त / दोगुना लौटाना)
  • संपत्ति पर कोई लोन या विवाद नहीं, यह विक्रेता का वादा
  • रजिस्ट्री का ख़र्च कौन देगा

ख़रीदने से पहले संपत्ति के काग़ज़ और भार-मुक्ति जाँचें: EC (भार प्रमाण पत्र), सर्कल रेट और रजिस्ट्री ख़र्च।

स्टांप ड्यूटी राज्य के हिसाब से अलग है: स्टांप ड्यूटी कैलकुलेटर और कितने का स्टांप पेपर लगेगा देखें।

भरा हुआ उदाहरण: फ़्लैट का बयाना

विक्रेता: श्री प्रदीप जैन, निवासी इंदौर। क्रेता: श्रीमती रश्मि चौहान, निवासी भोपाल।
संपत्ति: फ़्लैट नं. B-203, सनराइज़ अपार्टमेंट, विजय नगर, इंदौर, क्षेत्रफल 1,050 वर्ग फ़ुट (सुपर एरिया), एक कवर्ड पार्किंग सहित।
कुल मूल्य: ₹42,00,000; आज बयाना ₹2,00,000 (चेक नं. ____, SBI) प्राप्त; बाक़ी ₹40,00,000 रजिस्ट्री के समय, जो 31-01-2027 तक होगी।
शर्तें: विक्रेता संपत्ति पर कोई लोन/बकाया न होने का सबूत देगा; क्रेता तय तारीख़ तक भुगतान न करे तो बयाने में से ₹50,000 काटे जाएँगे; विक्रेता मुकरे तो बयाने का दोगुना लौटाएगा।
हस्ताक्षर: विक्रेता ____, क्रेता ____ गवाह: (1) ____ (2) ____

नाम, नंबर और जगहें उदाहरण के लिए हैं; अपनी जानकारी ऊपर के टूल में भरें।

बयाना देने से पहले जाँच

  • मालिकाना काग़ज़: विक्रेता की रजिस्टर्ड सेल डीड, नामांतरण और पिछले 13-30 साल का एनकम्ब्रेंस (भार) प्रमाण पत्र देखें*; गिरवी हो तो बैंक का NOC माँगें।
  • बयाना बैंक से: बयाना चेक/बैंक ट्रांसफ़र से दें; नकद में बड़ी रकम (₹20,000 से ज़्यादा) लेने पर इनकम टैक्स के नियम (धारा 269SS/269ST) में दिक़्क़त होती है।
  • रजिस्टर्ड एग्रीमेंट: कई राज्यों में कब्ज़े वाले एग्रीमेंट टू सेल पर लगभग पूरी स्टांप ड्यूटी लगती है*; कब्ज़ा रजिस्ट्री के बाद लें तो एग्रीमेंट सस्ता पड़ता है।
  • TDS: ₹50 लाख या ज़्यादा की संपत्ति ख़रीदने पर ख़रीदार को 1% TDS काटकर जमा करना होता है (फ़ॉर्म 26QB)।

सेल एग्रीमेंट (बिक्री इक़रारनामा): अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

एग्रीमेंट टू सेल और सेल डीड में क्या फ़र्क है? एग्रीमेंट भविष्य में बेचने का वादा है; सेल डीड (बैनामा) की रजिस्ट्री से मालिकाना हक़ ख़रीदार को जाता है।

क्या बयाना पत्र की रजिस्ट्री ज़रूरी है? कई राज्यों में, ख़ासकर कब्ज़ा देने पर, हाँ*; रजिस्टर्ड एग्रीमेंट ज़्यादा सुरक्षित है।

रजिस्ट्री न हो तो बयाना वापस मिलेगा? एग्रीमेंट की शर्त पर निर्भर। विवाद होने पर विशिष्ट अनुतोष अधिनियम के तहत कोर्ट में मुक़दमा हो सकता है।

यह नमूना आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले फ़ॉर्मेट और संबंधित क़ानून (रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1908, संपत्ति अंतरण अधिनियम 1882, भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम 1925, भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 और राज्यों के स्टांप क़ानून) के आधार पर Parachar ने बनाया (26 अक्टूबर 2026)। यह क़ानूनी सलाह नहीं है; अचल संपत्ति वाले दस्तावेज़ के लिए वकील या रजिस्ट्री दफ़्तर से जाँच कराएँ।

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