21 नवंबर 2025 से नए लेबर कोड (सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020) लागू हैं। अब फ़िक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट वाले कर्मचारी को 5 साल नहीं, 1 साल की नौकरी पर ही ग्रेच्युटी का हक है। पक्की नौकरी में 5 साल की शर्त वैसी ही है। हिसाब का तरीका भी वही है: आख़िरी बेसिक + DA × 15 ÷ 26 × नौकरी के साल।
ग्रेच्युटी कैलकुलेटर
नौकरी कितने साल की है और आख़िरी बेसिक सैलरी भरें। टूल बताएगा कि ग्रेच्युटी का हक बनता है या नहीं, और कितनी रकम मिलेगी। कोई फ़ोन नंबर नहीं माँगा जाता।
मुफ़्त अनुमान, कंपनी या सरकार का आँकड़ा नहीं। नियम 14 अक्टूबर 2026 को जाँचे।
ग्रेच्युटी चार्ट: सैलरी और साल के हिसाब से
| बेसिक + DA | 5 साल | 10 साल | 15 साल | 20 साल | 25 साल | 30 साल |
|---|---|---|---|---|---|---|
| ₹15,000 | ₹43,269 | ₹86,538 | ₹1,29,808 | ₹1,73,077 | ₹2,16,346 | ₹2,59,615 |
| ₹25,000 | ₹72,115 | ₹1,44,231 | ₹2,16,346 | ₹2,88,462 | ₹3,60,577 | ₹4,32,692 |
| ₹40,000 | ₹1,15,385 | ₹2,30,769 | ₹3,46,154 | ₹4,61,538 | ₹5,76,923 | ₹6,92,308 |
| ₹60,000 | ₹1,73,077 | ₹3,46,154 | ₹5,19,231 | ₹6,92,308 | ₹8,65,385 | ₹10,38,462 |
| ₹1,00,000 | ₹2,88,462 | ₹5,76,923 | ₹8,65,385 | ₹11,53,846 | ₹14,42,308 | ₹17,30,769 |
कंपनी में 10 या ज़्यादा कर्मचारी होने पर। ₹20 लाख की कानूनी सीमा लागू की गई है।
नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी के 5 बड़े बदलाव
- फ़िक्स्ड-टर्म कर्मचारी: 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी का हक। पहले 5 साल चाहिए थे।
- 50% सैलरी नियम: भत्ते (HRA, स्पेशल अलाउंस वगैरह) कुल सैलरी के आधे से ज़्यादा हों तो ज़्यादा वाला हिस्सा भी ग्रेच्युटी की सैलरी में जुड़ता है*। इससे कई लोगों की ग्रेच्युटी बढ़ेगी।
- पक्की नौकरी: 5 साल लगातार सर्विस की शर्त वही है। मौत या स्थायी विकलांगता पर यह शर्त नहीं लगती।
- हिसाब: 6 महीने से ज़्यादा का हिस्सा पूरा साल गिना जाता है। जैसे 7 साल 7 महीने = 8 साल, पर 7 साल 6 महीने = 7 साल।
- भुगतान: कंपनी को 30 दिन के अंदर देना होता है, देर पर ब्याज। ₹20 लाख तक टैक्स-फ़्री।
उदाहरण
रमेश की आख़िरी बेसिक + DA ₹30,000 है और नौकरी 12 साल 8 महीने की। 8 महीने 6 से ज़्यादा हैं, तो 13 साल गिने जाएँगे। ग्रेच्युटी = 30,000 × 15 ÷ 26 × 13 = ₹2,25,000।
ग्रेच्युटी न मिले तो क्या करें
- कंपनी को Form I (ग्रेच्युटी की अर्ज़ी) लिखित में दें और उसकी कॉपी रखें।
- 30 दिन में पैसा न मिले तो ज़िले के श्रम विभाग (Controlling Authority) में शिकायत करें।
- ग्रेच्युटी के लिए नॉमिनी का फ़ॉर्म (Form F) नौकरी के दौरान भरवा लें।
ग्रेच्युटी: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ग्रेच्युटी कैसे निकालते हैं? आख़िरी महीने की बेसिक + DA × 15 ÷ 26 × नौकरी के पूरे साल। 6 महीने से ज़्यादा का हिस्सा पूरा साल गिना जाता है।
नए लेबर कोड में कितने साल पर ग्रेच्युटी मिलती है? फ़िक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर 1 साल पर। पक्की नौकरी में 5 साल लगातार सर्विस पर। मौत या स्थायी विकलांगता पर कोई न्यूनतम अवधि नहीं।
₹30,000 बेसिक पर 10 साल की ग्रेच्युटी कितनी होगी? 30,000 × 15 ÷ 26 × 10 = ₹1,73,077।
क्या 4 साल 240 दिन पर ग्रेच्युटी मिलती है? कुछ हाई कोर्ट ने 5वें साल में 240 दिन काम करने को 5 साल माना है, पर यह हर कंपनी पर अपने आप लागू नहीं होता*। कंपनी से लिखित में पूछें।
ग्रेच्युटी की ज़्यादा से ज़्यादा सीमा कितनी है? प्राइवेट नौकरी में कानूनी सीमा ₹20 लाख है और इतनी रकम टैक्स-फ़्री है। कंपनी ज़्यादा दे सकती है, पर ऊपर की रकम पर टैक्स लगेगा।
नए लेबर कोड से ग्रेच्युटी बढ़ेगी क्या? जिनकी बेसिक + DA कुल सैलरी के 50% से कम है, उनकी ग्रेच्युटी की सैलरी बढ़कर कुल सैलरी का आधा मानी जाएगी*, इसलिए ग्रेच्युटी बढ़ सकती है।
ग्रेच्युटी कितने दिन में मिलती है? कंपनी को देय होने के 30 दिन के अंदर भुगतान करना होता है। देर होने पर ब्याज भी देना होता है।
10 से कम कर्मचारी वाली दुकान/कंपनी में ग्रेच्युटी मिलती है? ऐसी जगहें ग्रेच्युटी कानून के दायरे में नहीं आतीं; वहाँ कंपनी की अपनी पॉलिसी चलती है। कई जगह 15/30 वाला तरीका अपनाया जाता है।
स्रोत (14 अक्टूबर 2026 को जाँचे): सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 (21 नवंबर 2025 से लागू) और श्रम मंत्रालय की जानकारी, ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम 1972, Business Today (अप्रैल 2026), Kredily, Aditya Birla Sun Life। * वाले नियमों की व्याख्या पर अभी एक राय नहीं है। यह अनुमान है, कंपनी का आँकड़ा नहीं।
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5 साल से पहले ग्रेच्युटी मिलती है? सामान्यतः नहीं; अपवाद मृत्यु/अपंगता (कोई न्यूनतम नहीं) और 4 साल 240 दिन (हाई कोर्ट फ़ैसलों पर, नियोक्ता मना करे तो दावा करना पड़ता है)*; फ़िक्स्ड-टर्म में संहिता लागू होने पर 1 साल*।
ग्रेच्युटी नहीं मिली तो क्या करें? फ़ॉर्म I नियोक्ता को, फिर फ़ॉर्म N से Controlling Authority (सहायक श्रम आयुक्त) में 90 दिन में दावा; आदेश, 10% ब्याज, कलेक्टर से वसूली; सज़ा का प्रावधान भी।
CTC में ग्रेच्युटी दिखती है तो 5 साल से पहले मिलेगी? नहीं; CTC में दिखाना सिर्फ़ प्रावधान है, अधिकार अधिनियम से बनता है; कुछ कंपनियाँ नीति से देती हैं, पर बाध्य नहीं।