कोर्ट फ़ीस कितनी लगती है 2026: सिविल केस कोर्ट फ़ीस कैलकुलेटर, दिल्ली 2/3/4%, UP, महाराष्ट्र, माफ़ी और वापसी

सिविल केस में कोर्ट फ़ीस दावे की रकम के अनुपात (ad valorem) में लगती है और राज्य-वार अलग है: दिल्ली में ₹50,000 तक 2% (न्यूनतम ₹1,000), ₹50,001 से ₹20 लाख तक 3% और ₹20 लाख से ऊपर 4% (कोर्ट फ़ीस दिल्ली संशोधन अधिनियम 2012); उत्तर प्रदेश में लगभग 5% से 7.5% के स्लैब*; महाराष्ट्र में ~5%, अधिकतम ₹3 लाख*; हरियाणा/पंजाब में कम (~1-2.5%)*। निषेधाज्ञा, घोषणा, तलाक और चेक बाउंस शिकायत पर निश्चित (₹100-500) फ़ीस*। लोक अदालत या मध्यस्थता में समझौता हो तो पूरी कोर्ट फ़ीस वापस मिलती है; निर्धन व्यक्ति (आदेश 33 CPC) को माफ़ी; ₹5 लाख तक के उपभोक्ता विवाद में उपभोक्ता आयोग की फ़ीस शून्य। नीचे का कैलकुलेटर आपके राज्य और रकम की फ़ीस बताता है।

कोर्ट फ़ीस कैलकुलेटर

राज्य, केस का प्रकार और रकम भरें। टूल बताएगा कोर्ट फ़ीस, वकील खर्च का अनुमान और माफ़ी/वापसी के रास्ते।

कोर्ट फ़ीस अधिनियम 1870 व राज्य संशोधनों पर आधारित; दिल्ली सटीक, अन्य राज्य अनुमान। अदालत का ई-कोर्ट फ़ीस कैलकुलेटर अंतिम। 14 अक्टूबर 2026 को जाँचे।

राज्य-वार ad valorem स्लैब (पैसे/संपत्ति के दावे)

राज्यस्लैबस्रोत/स्थिति
दिल्ली₹50,000 तक 2% (न्यूनतम ₹1,000); ₹50,001-20 लाख 3%; 20 लाख+ 4%; बँटवारा: बाज़ार मूल्य पर, न्यूनतम ₹1,000कोर्ट फ़ीस (दिल्ली संशोधन) अधिनियम 2012, अनुसूची I (सटीक)
उत्तर प्रदेश~5% (₹1 लाख तक), 6% (₹2 लाख तक), 7% (₹5 लाख तक), 7.5% ऊपरUP संशोधित अनुसूची I, कैलकुलेटर साइट से, असत्यापित*
महाराष्ट्र~5%, न्यूनतम ₹60, अधिकतम ₹3,00,000महाराष्ट्र कोर्ट फ़ीस अधिनियम 1959*
हरियाणा/पंजाब~1-2.5% (स्लैब)कोर्ट फ़ीस अधिनियम 1870 पंजाब संशोधन*
बिहार, MP, राजस्थान, अन्य~2-7%, कई में अधिकतम सीमाराज्य अधिनियम*
उपभोक्ता आयोग₹5 लाख तक ₹0; ₹10 लाख तक ₹200 … उपभोक्ता कोर्ट फ़ीस चेकर

निश्चित फ़ीस वाले केस (अनुमान)

केसकोर्ट फ़ीसनोट
निषेधाज्ञा (injunction)/घोषणा (declaration) बिना परिणामी राहत₹20-500*परिणामी राहत (कब्ज़ा/पैसा) माँगी तो ad valorem
चेक बाउंस शिकायत (धारा 138 NI Act)₹100-500 + प्रोसेस फ़ीस*आपराधिक शिकायत; टाइमलाइन
तलाक/भरण-पोषण/अभिरक्षा₹50-500*पारिवारिक अदालत; भरण-पोषण (धारा 125 BNSS) मुफ़्त
किरायेदार बेदख़लीकिराया-आधारित या निश्चित*किराया नियंत्रण अधिनियम/संपत्ति मूल्य
उत्तराधिकार प्रमाणपत्र/प्रोबेटसंपत्ति मूल्य का 2-7.5%*, अधिकतम सीमाराज्य-वार; नॉमिनी क्लेम
अपीलमूल फ़ीस के बराबर/आधी*हाई कोर्ट नियम

फ़ीस कम/माफ़/वापस कैसे

  1. लोक अदालत या अदालत-निर्देशित मध्यस्थता में समझौता: पूरी कोर्ट फ़ीस वापस (विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम धारा 21, कोर्ट फ़ीस अधिनियम धारा 16)।
  2. निर्धन व्यक्ति (आदेश 33 CPC): संपत्ति ₹1,000 से कम या फ़ीस चुकाने में असमर्थ, शपथपत्र पर अदालत जाँच कर फ़ीस टालती/माफ़ करती है।
  3. मुफ़्त वकील: ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA): महिला, बच्चे, SC/ST, दिव्यांग, हिरासत में, और ~₹3 लाख वार्षिक आय तक (राज्य-वार) सभी।
  4. छोटे पैसे के दावे: ₹20 लाख तक समरी सूट (आदेश 37 CPC), वाणिज्यिक विवाद ₹3 लाख+ वाणिज्यिक अदालत (पूर्व-मध्यस्थता अनिवार्य); उपभोक्ता मामले उपभोक्ता आयोग में सस्ते।
  5. ई-कोर्ट फ़ीस: स्टॉक होल्डिंग (SHCIL) ई-स्टाम्प/ई-कोर्ट फ़ीस पोर्टल से ऑनलाइन; गलत फ़ीस पर अदालत समय देकर पूरा करवाती है, केस ख़ारिज नहीं।

कोर्ट फ़ीस: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सिविल केस की कोर्ट फ़ीस कितनी लगती है? दावे की रकम के अनुपात में, राज्य-वार: दिल्ली 2% (₹50,000 तक, न्यूनतम ₹1,000), 3% (₹20 लाख तक), 4% ऊपर; UP ~5-7.5%*, महाराष्ट्र ~5% (अधिकतम ₹3 लाख)*।

₹10 लाख की वसूली के केस में कोर्ट फ़ीस? दिल्ली में 3% = ₹30,000; UP में ~7.5% = ₹75,000*; महाराष्ट्र ~5% = ₹50,000*; हरियाणा/पंजाब ~₹20,000*।

कोर्ट फ़ीस वापस कब मिलती है? लोक अदालत/मध्यस्थता में समझौता होने पर पूरी वापस; केस वापस लेने पर आम तौर पर नहीं (कुछ राज्यों में आंशिक)।

कोर्ट फ़ीस नहीं भर सकते तो? निर्धन व्यक्ति के रूप में आवेदन (आदेश 33 CPC): शपथपत्र, अदालत जाँच; मंज़ूर होने पर फ़ीस टल जाती है, केस जीतने पर प्रतिवादी से/डिक्री से वसूल।

चेक बाउंस केस में कोर्ट फ़ीस? आपराधिक शिकायत: नाममात्र ₹100-500 + प्रोसेस फ़ीस*; अलग से सिविल वसूली करें तो ad valorem; धारा 143A में 20% अंतरिम मुआवज़ा।

निषेधाज्ञा (स्टे) के केस में फ़ीस? बिना परिणामी राहत की घोषणा/निषेधाज्ञा पर निश्चित फ़ीस ₹20-500*; कब्ज़ा या पैसा भी माँगा तो मूल्य पर ad valorem।

वकील की फ़ीस कितनी होती है? ज़िला अदालत में ₹10,000-50,000 केस-वार (बातचीत से, पेशी-वार ₹1,000-5,000 भी)*; हाई कोर्ट ज़्यादा; DLSA से मुफ़्त वकील पात्रता पर।

कोर्ट फ़ीस कैसे भरें? ई-कोर्ट फ़ीस (SHCIL पोर्टल/अधिकृत केंद्र) या कोर्ट फ़ीस स्टाम्प, प्लेंट पर चिपकाकर/संलग्न; कई हाई कोर्ट में ऑनलाइन ई-फ़ाइलिंग के साथ।

उपभोक्ता आयोग में फ़ीस कितनी? ₹5 लाख तक शून्य, ₹10 लाख तक ₹200, ₹20 लाख तक ₹400, ₹50 लाख तक ₹1,000, ₹1 करोड़ तक ₹2,000; सिविल कोर्ट से बहुत सस्ता।

स्रोत (14 अक्टूबर 2026 को जाँचे): कोर्ट फ़ीस (दिल्ली संशोधन) अधिनियम 2012 (दिल्ली अधिनियम 11/2012) अनुसूची I अनुच्छेद 1 (indiacode अधिसूचना PDF, legitquest, casemine, advocatetanmoy पाठ); कोर्ट फ़ीस अधिनियम 1870 व राज्य संशोधन; UP स्लैब vakeel360 कोर्ट फ़ीस कैलकुलेटर से (असत्यापित)*; महाराष्ट्र कोर्ट फ़ीस अधिनियम 1959 (legitquest; अधिकतम सीमा*); सुप्रीम कोर्ट State of Punjab v. Dev Brat Sharma (2022) पैसे के दावे पर ad valorem; CaseMine “Ad Valorem Court Fees in India”; विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 धारा 21; CPC आदेश 33, 37। * = राज्य-वार, पुष्टि ज़रूरी; स्लैब पूरे मूल्य पर लगाए गए हैं। यह अनुमान है, अदालत रजिस्ट्री अंतिम।

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