बिज़नेस शुरू करते समय पहला फ़ैसला ढाँचे का है: प्रोप्राइटरशिप (सबसे सस्ती, पर निजी संपत्ति दायी), पार्टनरशिप (2+ लोग, असीमित दायित्व), OPC (अकेले मालिक की कंपनी, सीमित दायित्व), LLP (2+ पार्टनर, सीमित दायित्व, कम अनुपालन) या प्राइवेट लिमिटेड (निवेशक और स्टार्टअप लाभ, सबसे ज़्यादा अनुपालन)। ग़लत चुनाव का मतलब है हर साल बेवजह ₹15,000-40,000 का खर्च, या उलटा, कर्ज़ डूबने पर घर पर दावा। ऊपर छह सवाल (मालिक कितने, निजी संपत्ति बचानी है, पैसा कहाँ से, टर्नओवर, कागज़ी काम, मुनाफ़ा) के जवाब दें; टूल ढाँचा, विकल्प, खर्च और टैक्स तुलना देगा। रजिस्ट्रेशन के बाद उद्यम रजिस्ट्रेशन (मुफ़्त) और GST कब ज़रूरी देखें।
कंपनी-प्रकार चूज़र: प्रोप्राइटरशिप, पार्टनरशिप, OPC, LLP या Pvt Ltd?
छह सवालों के जवाब दें; टूल सही ढाँचा, उसका खर्च, हर साल का काम, टैक्स और शुरू करने के स्टेप्स बताएगा।
कंपनी अधिनियम 2013, LLP अधिनियम 2008, भागीदारी अधिनियम 1932 और FY 2026-27 की टैक्स दरों पर आधारित। * = फ़ीस राज्य/प्रोफ़ेशनल पर निर्भर। यह जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। 18 अक्टूबर 2026 को जाँचा।
पाँच ढाँचों की तुलना एक नज़र में
| प्रोप्राइटरशिप (एकल स्वामित्व) | पार्टनरशिप फ़र्म | OPC (वन पर्सन कंपनी) | LLP (सीमित दायित्व भागीदारी) | प्राइवेट लिमिटेड कंपनी | |
|---|---|---|---|---|---|
| मालिक | 1 मालिक | 2-50 पार्टनर | 1 सदस्य + 1 नॉमिनी (भारतीय नागरिक; NRI भी, 120 दिन निवास) | 2+ पार्टनर, कोई ऊपरी सीमा नहीं; 2 डेज़िग्नेटेड पार्टनर (1 भारत निवासी) | 2-200 शेयरधारक, 2+ डायरेक्टर (1 भारत निवासी) |
| क़ानून | कोई अलग क़ानून नहीं; GST/उद्यम/शॉप एक्ट से पहचान | भारतीय भागीदारी अधिनियम 1932; डीड, रजिस्ट्रार (वैकल्पिक पर सलाह दी जाती है) | कंपनी अधिनियम 2013; MCA SPICe+ से | LLP अधिनियम 2008; MCA FiLLiP से | कंपनी अधिनियम 2013; MCA SPICe+ से |
| दायित्व | असीमित: निजी संपत्ति भी दायी | असीमित और संयुक्त: हर पार्टनर पूरी देनदारी के लिए दायी | सीमित: शेयर पूँजी तक | सीमित: योगदान तक; एक पार्टनर की गलती दूसरे पर नहीं | सीमित: शेयर पूँजी तक |
| बनाने का खर्च | ₹0-2,000* (उद्यम मुफ़्त, GST मुफ़्त; शॉप एक्ट राज्य फ़ीस) | ₹2,000-10,000* (डीड स्टाम्प राज्य-वार + रजिस्ट्रेशन फ़ीस) | सरकारी फ़ीस ₹15 लाख पूँजी तक शून्य* + राज्य स्टाम्प + DSC/प्रोफ़ेशनल ₹5,000-12,000* | सरकारी फ़ीस ₹500-5,000* (योगदान पर) + स्टाम्प + DSC/प्रोफ़ेशनल ₹5,000-10,000* | सरकारी फ़ीस ₹15 लाख पूँजी तक शून्य* + राज्य स्टाम्प + DSC/प्रोफ़ेशनल ₹6,000-15,000* |
| समय | 1-7 दिन | 7-15 दिन | 7-15 दिन | 10-20 दिन | 7-15 दिन |
| हर साल | सिर्फ़ ITR (ITR-3/4); ऑडिट टर्नओवर ₹1 करोड़+ (डिजिटल ₹10 करोड़+) पर | ITR-5; ऑडिट ₹1 करोड़+ पर; पार्टनर को वेतन/ब्याज पर TDS 194T (₹20,000+) | ऑडिट अनिवार्य, AOC-4, MGT-7A, ITR-6, DIR-3 KYC; बोर्ड मीटिंग 1 (एक डायरेक्टर पर छूट) | Form 11 (30 मई), Form 8 (30 अक्टूबर), ITR-5; ऑडिट तभी जब टर्नओवर ₹40 लाख+ या योगदान ₹25 लाख+; बोर्ड मीटिंग नहीं | ऑडिट अनिवार्य, AOC-4, MGT-7, ADT-1, DIR-3 KYC, 4 बोर्ड मीटिंग, AGM, ITR-6 |
| टैक्स | स्लैब दर (नई व्यवस्था: ₹12 लाख तक शून्य) | 30% + 4% सेस (पार्टनर का वेतन/ब्याज फ़र्म में कटौती योग्य; पार्टनर पर मुनाफ़े का हिस्सा टैक्स-फ़्री) | 25% + सेस (टर्नओवर ₹400 करोड़ तक) या 22% (115BAA); पैसा निकालने पर डिविडेंड पर स्लैब टैक्स | 30% + 4% सेस; डिविडेंड टैक्स नहीं (मुनाफ़ा पार्टनर को टैक्स-फ़्री) | 25% + सेस (टर्नओवर ₹400 करोड़ तक), 22% (115BAA), 15% नई मैन्युफ़ैक्चरिंग*; डिविडेंड पर स्लैब टैक्स |
| फ़ंडिंग | निजी पूँजी, मुद्रा/PMEGP लोन; निवेशक नहीं | पार्टनर पूँजी, बैंक लोन; निवेशक नहीं | बैंक लोन; इक्विटी निवेशक नहीं (पहले Pvt Ltd में बदलना होगा, कभी भी संभव) | बैंक लोन, पार्टनर पूँजी; VC/ESOP व्यावहारिक नहीं | सबसे आसान: एंजल/VC, ESOP, DPIIT स्टार्टअप लाभ (धारा 80-IAC) |
| बंद करना | सबसे आसान: GST रद्द, खाता बंद | आसान: विघटन डीड | STK-2 (फ़ास्ट ट्रैक), ₹10,000* फ़ीस | Form 24, 3-6 महीने | STK-2 फ़ास्ट ट्रैक ₹10,000*, 3-6 महीने |
| सालाना खर्च | ₹2,000-5,000*/साल (ITR) | ₹5,000-15,000*/साल | ₹12,000-25,000*/साल | ₹8,000-15,000*/साल (बिना ऑडिट) | ₹15,000-40,000*/साल |
यही तालिका ऊपर के टूल में है। * = सरकारी फ़ीस राज्य के स्टाम्प और अधिकृत पूँजी पर, प्रोफ़ेशनल फ़ीस CA/CS पर निर्भर; MCA ने ₹15 लाख तक की पूँजी पर इनकॉर्पोरेशन की सरकारी फ़ीस शून्य की है, स्टाम्प ड्यूटी राज्य-वार लगती है।
किसके लिए क्या (संक्षेप में)
| स्थिति | सही ढाँचा | क्यों |
|---|---|---|
| अकेले, छोटा काम (दुकान, फ़्रीलांसिंग, ऑनलाइन बिक्री) | प्रोप्राइटरशिप | उद्यम + GST (ज़रूरत पर) बस; ITR-4; बंद करना आसान |
| अकेले, पर कर्ज़/ग्राहक बड़े, निजी संपत्ति बचानी है | OPC | सीमित दायित्व; बाद में Pvt Ltd में बदलना आसान |
| 2-4 दोस्त/परिवार, छोटा काम, कम कागज़ | पार्टनरशिप | डीड ही नियम; पर दायित्व असीमित और संयुक्त |
| 2+ प्रोफ़ेशनल/कंसल्टेंट/ट्रेडर, निजी संपत्ति सुरक्षित | LLP | सीमित दायित्व, ऑडिट ₹40 लाख तक नहीं, डिविडेंड टैक्स नहीं |
| स्टार्टअप, निवेशक/ESOP, DPIIT मान्यता | प्राइवेट लिमिटेड | शेयर बिक सकते हैं; 80-IAC छूट; साख सबसे ज़्यादा |
| मैन्युफ़ैक्चरिंग, टेंडर, बैंक CC लिमिट बड़ी | प्राइवेट लिमिटेड / LLP | कंपनी 25% टैक्स और साख; LLP सस्ती अगर मुनाफ़ा बाँटना है |
टैक्स की तुलना: मुनाफ़े पर कौन कितना देगा (FY 2026-27, लगभग)
| सालाना मुनाफ़ा | प्रोप्राइटरशिप (नई व्यवस्था) | पार्टनरशिप / LLP (30%) | OPC / Pvt Ltd (25%) |
|---|---|---|---|
| ₹8,00,000 | ₹0 | ₹2,49,600 | ₹2,08,000 |
| ₹12,00,000 | ₹0 | ₹3,74,400 | ₹3,12,000 |
| ₹20,00,000 | ₹2,08,000 | ₹6,24,000 | ₹5,20,000 |
| ₹50,00,000 | ₹11,23,200 | ₹15,60,000 | ₹13,00,000 |
| ₹1,00,00,000 | ₹26,83,200 | ₹31,20,000 | ₹26,00,000 |
4% सेस शामिल; सरचार्ज, 80C जैसी कटौतियाँ और पार्टनर वेतन (फ़र्म/LLP में मुनाफ़ा घटाता है) शामिल नहीं। कंपनी में पैसा निकालने पर डिविडेंड पर स्लैब टैक्स अलग से। ₹12 लाख तक व्यक्ति पर 87A रिबेट से शून्य। नतीजा: ₹20-25 लाख मुनाफ़े तक प्रोप्राइटरशिप टैक्स में सबसे सस्ती; इसके ऊपर कंपनी, बशर्ते पैसा कंपनी में ही रखा जाए।
LLP vs Pvt Ltd: सबसे आम दुविधा
- LLP चुनें अगर निवेशक नहीं लाने, मुनाफ़ा हर साल पार्टनरों में बाँटना है (डिविडेंड टैक्स नहीं), ऑडिट से बचना है (₹40 लाख टर्नओवर / ₹25 लाख योगदान तक), और बोर्ड मीटिंग/AGM नहीं चाहिए।
- Pvt Ltd चुनें अगर एंजल/VC/ESOP, DPIIT स्टार्टअप मान्यता (80-IAC की 3 साल टैक्स छूट, एंजल टैक्स छूट), बड़े कॉरपोरेट ग्राहक/टेंडर, या मुनाफ़ा कंपनी में रखकर बढ़ाना है (25% टैक्स)।
- LLP की लेट फ़ीस: Form 8/11 देर से भरने पर छोटी LLP पर ₹10/दिन से बढ़ते स्लैब (बड़ी LLP पर ₹20/दिन)*, पहले ₹100/दिन असीमित थी।
- OPC बनाम प्रोप्राइटरशिप: OPC में सीमित दायित्व और “Pvt Ltd (OPC)” की साख है, पर अनिवार्य ऑडिट और ₹12,000-25,000*/साल; ₹2 करोड़ टर्नओवर/₹50 लाख पूँजी पर बदलने की पुरानी शर्त 2021 में हट गई।
रजिस्ट्रेशन के बाद सबको चाहिए
- उद्यम रजिस्ट्रेशन (मुफ़्त; MSME लाभ, 45-दिन भुगतान नियम, सरकारी टेंडर छूट)।
- GST: माल ₹40 लाख / सेवा ₹20 लाख (विशेष राज्य ₹10-20 लाख) टर्नओवर पर, या अंतरराज्यीय बिक्री/ई-कॉमर्स पर पहले से (GST रजिस्ट्रेशन चेकर)।
- चालू खाता, बिज़नेस के नाम से; कंपनी/LLP में PAN इनकॉर्पोरेशन के साथ मिलता है।
- कर्मचारी 10/20+ पर ESIC/EPFO; दुकान/ऑफ़िस पर राज्य शॉप एक्ट; खाद्य पर FSSAI।
- लोन/सब्सिडी: PMEGP (नई इकाई, 15-35% सब्सिडी), मुद्रा (₹20 लाख तक), योजना पात्रता चेकर।
कंपनी का ढाँचा चुनना: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
छोटे बिज़नेस के लिए प्रोप्राइटरशिप या OPC? अकेले, छोटा टर्नओवर और छोटा जोखिम हो तो प्रोप्राइटरशिप (खर्च लगभग शून्य, सिर्फ़ ITR)। कर्ज़ बड़ा या ग्राहक कॉरपोरेट हों और निजी संपत्ति बचानी हो तो OPC, पर ऑडिट अनिवार्य और ₹12,000-25,000*/साल।
LLP और प्राइवेट लिमिटेड में क्या फ़र्क है? दोनों में दायित्व सीमित। LLP: 30% टैक्स, डिविडेंड टैक्स नहीं, ऑडिट ₹40 लाख टर्नओवर/₹25 लाख योगदान तक नहीं, निवेशक नहीं। Pvt Ltd: 25% टैक्स, डिविडेंड पर अलग टैक्स, ऑडिट अनिवार्य, एंजल/VC/ESOP और DPIIT लाभ।
कंपनी रजिस्ट्रेशन का खर्च कितना है 2026? MCA की सरकारी फ़ीस ₹15 लाख अधिकृत पूँजी तक शून्य; राज्य की स्टाम्प ड्यूटी ₹500-10,000* और DSC/प्रोफ़ेशनल फ़ीस ₹5,000-15,000*। LLP में सरकारी फ़ीस ₹500-5,000* योगदान पर। पार्टनरशिप डीड ₹2,000-10,000*। प्रोप्राइटरशिप ₹0-2,000*।
OPC में कौन नहीं बन सकता? सिर्फ़ भारतीय नागरिक (NRI भी, 120 दिन निवास पर) एक ही OPC का सदस्य/नॉमिनी हो सकता है; नाबालिग नहीं। OPC NBFC/निवेश कंपनी नहीं बन सकती और इक्विटी निवेशक नहीं ले सकती (Pvt Ltd में बदलना होगा)।
पार्टनरशिप फ़र्म रजिस्टर करना ज़रूरी है? क़ानूनन अनिवार्य नहीं, पर बिना रजिस्ट्रेशन फ़र्म किसी तीसरे पक्ष पर अदालत में दावा नहीं कर सकती और पार्टनर आपस में भी नहीं। इसलिए डीड के साथ रजिस्ट्रार ऑफ़ फ़र्म्स में रजिस्ट्रेशन कराएँ।
LLP में ऑडिट कब ज़रूरी है? टर्नओवर ₹40 लाख से ज़्यादा या पार्टनर योगदान ₹25 लाख से ज़्यादा होने पर। इससे नीचे सिर्फ़ Form 11 (30 मई), Form 8 (30 अक्टूबर) और ITR-5।
प्रोप्राइटरशिप से LLP/कंपनी में बाद में बदल सकते हैं? हाँ। प्रोप्राइटरशिप का बिज़नेस कंपनी/LLP में ट्रांसफ़र हो सकता है; धारा 47 की शर्तें (मालिक की 50%+ हिस्सेदारी 5 साल, सारी संपत्ति-देनदारी ट्रांसफ़र) पूरी हों तो पूँजीगत लाभ टैक्स नहीं*। GST नंबर नया लेना होगा।
स्टार्टअप इंडिया (DPIIT) के लिए कौन सा ढाँचा? प्राइवेट लिमिटेड, LLP या रजिस्टर्ड पार्टनरशिप, तीनों मान्य; पर 80-IAC की टैक्स छूट और निवेश सिर्फ़ Pvt Ltd/LLP में व्यावहारिक, और VC लगभग हमेशा Pvt Ltd माँगते हैं।
स्रोत (18 अक्टूबर 2026 को जाँचे): mca.gov.in (SPICe+, FiLLiP, फ़ीस नियम), कंपनी अधिनियम 2013 (धारा 2(62), 3, 149), LLP अधिनियम 2008 व LLP नियम 2009 (ऑडिट सीमा, Form 8/11), भारतीय भागीदारी अधिनियम 1932, वित्त अधिनियम 2025 स्लैब, आयकर अधिनियम 2025 (कंपनी/फ़र्म दरें)। * = फ़ीस/लेट फ़ीस राज्य, पूँजी और प्रोफ़ेशनल पर निर्भर या द्वितीयक स्रोत से। यह जानकारी है, क़ानूनी/टैक्स सलाह नहीं।
और मुफ़्त टूल: उद्यम रजिस्ट्रेशन · GST रजिस्ट्रेशन · TDS चेकर · PMEGP लोन · मुद्रा लोन · सभी टूल · LLP/ROC लेट फ़ीस कैलकुलेटर · MSME-1 रिटर्न चेकर · शेयर सर्टिफ़िकेट (SH-1) जनरेटर · प्रोप्राइटरशिप रजिस्ट्रेशन चेकर · ट्रेडमार्क क्लास फ़ाइंडर · NGO चूज़र: ट्रस्ट, सोसाइटी या सेक्शन 8