नई टैक्स व्यवस्था में जिसकी टैक्सेबल आय ₹12 लाख तक है, उसे धारा 87A में ₹60,000 तक की रिबेट मिलती है और टैक्स ज़ीरो हो जाता है। सैलरी/पेंशन वालों को ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन भी मिलता है, इसलिए ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर कोई टैक्स नहीं। ₹12 लाख से थोड़ा ऊपर होने पर “मार्जिनल रिलीफ़” मिलती है: टैक्स उतना ही लगता है जितनी आय ₹12 लाख से ऊपर है। पुरानी व्यवस्था में रिबेट सिर्फ़ ₹5 लाख तक की आय पर, ₹12,500 तक है।
87A रिबेट कैलकुलेटर
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मुफ़्त टूल, कोई डेटा सेव नहीं होता। * = नियम की व्याख्या/अंदाज़ा, अपने CA या आधिकारिक स्रोत से मिलाएँ। 27 अक्टूबर 2026 को जाँचा।
सैलरी पर 87A के बाद कितना टैक्स (नई व्यवस्था)
| सैलरी | टैक्सेबल आय | स्लैब टैक्स | रिबेट + मार्जिनल रिलीफ़ | कुल टैक्स (सेस सहित) |
|---|---|---|---|---|
| ₹8,00,000 | ₹7,25,000 | ₹16,250 | ₹16,250 | ₹0 |
| ₹10,00,000 | ₹9,25,000 | ₹32,500 | ₹32,500 | ₹0 |
| ₹12,00,000 | ₹11,25,000 | ₹52,500 | ₹52,500 | ₹0 |
| ₹12,75,000 | ₹12,00,000 | ₹60,000 | ₹60,000 | ₹0 |
| ₹13,00,000 | ₹12,25,000 | ₹63,750 | ₹38,750 | ₹26,000 |
| ₹13,50,000 | ₹12,75,000 | ₹71,250 | ₹0 | ₹74,100 |
| ₹14,00,000 | ₹13,25,000 | ₹78,750 | ₹0 | ₹81,900 |
| ₹15,00,000 | ₹14,25,000 | ₹93,750 | ₹0 | ₹97,500 |
₹12.75 लाख से ₹13.4 लाख के बीच की सैलरी पर मार्जिनल रिलीफ़ टैक्स को बहुत कम रखती है; उसके बाद पूरा स्लैब टैक्स लगता है।
87A रिबेट की शर्तें
- सिर्फ़ भारत में रहने वाले (resident) व्यक्ति को, HUF या कंपनी को नहीं।
- नई व्यवस्था: कुल टैक्सेबल आय ₹12 लाख तक, रिबेट ₹60,000 तक। पुरानी: ₹5 लाख तक, रिबेट ₹12,500 तक।
- शेयर और म्यूचुअल फ़ंड के कैपिटल गेन (STCG 20%, LTCG 12.5%) जैसी स्पेशल रेट वाली आय पर लगे टैक्स पर रिबेट नहीं मिलती*।
- रिबेट सेस से पहले घटती है; रिबेट के बाद टैक्स ज़ीरो तो सेस भी ज़ीरो।
- रिबेट ITR भरते समय अपने आप लगती है; नियोक्ता TDS में भी इसे गिनता है।
पुरानी व्यवस्था में 87A
पुरानी व्यवस्था में ₹5 लाख तक की टैक्सेबल आय पर ₹12,500 तक रिबेट है। जैसे ₹7 लाख की सैलरी − ₹50,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन − ₹1.5 लाख 80C = ₹5 लाख टैक्सेबल, तो टैक्स ज़ीरो। 80C/80D का हिसाब: 80C/80D कैलकुलेटर।
87A रिबेट: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
87A रिबेट कितनी है? नई व्यवस्था में ₹60,000 तक (₹12 लाख टैक्सेबल आय तक), पुरानी में ₹12,500 तक (₹5 लाख तक)।
₹12.75 लाख सैलरी पर टैक्स कितना है? नई व्यवस्था में ज़ीरो: ₹75,000 स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल आय ₹12 लाख, जिस पर ₹60,000 का पूरा टैक्स रिबेट से माफ़।
₹13 लाख सैलरी पर कितना टैक्स लगेगा? टैक्सेबल आय ₹12.25 लाख; मार्जिनल रिलीफ़ से टैक्स ₹25,000 + 4% सेस = ₹26,000।
मार्जिनल रिलीफ़ क्या है? अगर आय ₹12 लाख से थोड़ी ऊपर है, तो टैक्स उस ऊपर वाली रकम से ज़्यादा नहीं लगता। जैसे ₹12.1 लाख टैक्सेबल आय पर टैक्स ₹10,000 (+ सेस), ₹61,500 नहीं।
नए आयकर अधिनियम 2025 में 87A का क्या हुआ? 1 अप्रैल 2026 से नया कानून लागू है और रिबेट की धारा का नंबर बदला है (धारा 156*), पर रकम और शर्तें वही हैं।
स्रोत (27 अक्टूबर 2026 को जाँचे): टैक्स दरें FY 2026-27 (टैक्स वर्ष 2026-27): बजट 2026 में स्लैब नहीं बदले, जो वित्त अधिनियम 2025 से लागू हैं: नई व्यवस्था 0-4 लाख शून्य, फिर हर 4 लाख पर 5/10/15/20/25/30%; ₹12 लाख तक टैक्सेबल आय पर ₹60,000 तक रिबेट और मार्जिनल रिलीफ़; स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹75,000। पुरानी व्यवस्था: ₹5 लाख तक ₹12,500 रिबेट, स्टैंडर्ड डिडक्शन ₹50,000। 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम 2025 लागू है; 87A, 80C, 80D जैसी धाराओं के नंबर नए कानून में बदल गए हैं (87A की जगह धारा 156*), पर रकम और शर्तें वही हैं। सेस 4%।
और मुफ़्त टूल: इनकम टैक्स कैलकुलेटर · 87A रिबेट · 80C/80D कटौती · NPS निकासी नियम · NPS कैलकुलेटर · एडवांस टैक्स · होम लोन टैक्स छूट · Form 16 रीडर + रिफ़ंड चेकर