क़ानून साफ़ है: दिन में 9 घंटे या हफ़्ते में 48 घंटे से ज़्यादा काम पर ओवरटाइम सामान्य वेतन का दोगुना मिलना चाहिए (फ़ैक्टरी अधिनियम धारा 59, अब OSH कोड 2020 धारा 27), फिर भी ज़्यादातर मज़दूरों को सिंगल रेट या 1.5 गुना मिलता है या बिल्कुल नहीं। सूत्र: (बेसिक + DA) ÷ 26 दिन ÷ 8 घंटे = एक घंटे की दर; ओवरटाइम दर उसका दोगुना। ₹26,000 वेतन पर एक घंटे की दर ₹125, ओवरटाइम ₹250/घंटा, 10 घंटे = ₹2,500। तिमाही में अधिकतम 125 घंटे ओवरटाइम कराया जा सकता है। नीचे का टूल आपकी रकम निकालता है और कम दर पकड़ता है।
ओवरटाइम कैलकुलेटर
वेतन और ओवरटाइम के घंटे भरें। टूल घंटे की दर, दोगुनी दर और कुल रकम बताएगा, और यह भी कि कंपनी कम दर दे रही है या तिमाही की सीमा पार हो रही है।
फ़ैक्टरी अधिनियम / OSH कोड पर मुफ़्त अनुमान; राज्य के नियम अलग हो सकते हैं। नियम 14 अक्टूबर 2026 को जाँचे।
ओवरटाइम के नियम एक नज़र में
| नियम | फ़ैक्टरी अधिनियम 1948 / OSH कोड 2020 | दुकान-प्रतिष्ठान (राज्य) |
|---|---|---|
| सामान्य घंटे | 9/दिन, 48/हफ़्ता; फैलाव 10.5 घंटे | 8-9/दिन, 48/हफ़्ता (राज्य के हिसाब से) |
| ओवरटाइम दर | सामान्य दर का 2 गुना | ज़्यादातर राज्यों में 2 गुना* |
| सीमा | 125 घंटे/तिमाही (मसौदा केंद्रीय नियम)*; पहले 50-75 | राज्य नियम (जैसे महाराष्ट्र 125/तिमाही) |
| सहमति | मज़दूर की लिखित/मौखिक सहमति ज़रूरी (OSH कोड) | वही |
| साप्ताहिक छुट्टी | छुट्टी के दिन काम पर दोगुना + बदले में छुट्टी | वही |
सूत्र और उदाहरण
| मासिक वेतन (बेसिक+DA) | घंटे की दर (÷26÷8) | ओवरटाइम दर (×2) | 10 घंटे | 30 घंटे |
|---|---|---|---|---|
| ₹12,000 | ₹57.69 | ₹115.38 | ₹1,154 | ₹3,462 |
| ₹18,000 | ₹86.54 | ₹173.08 | ₹1,731 | ₹5,192 |
| ₹26,000 | ₹125 | ₹250 | ₹2,500 | ₹7,500 |
| ₹35,000 | ₹168.27 | ₹336.54 | ₹3,365 | ₹10,096 |
दैनिक मज़दूरी वाले: दिन की मज़दूरी ÷ 8 × 2 × घंटे। न्यूनतम मज़दूरी से कम वेतन पर ओवरटाइम न्यूनतम मज़दूरी के दोगुने पर बनता है।
किसे ओवरटाइम नहीं मिलता
- प्रबंधकीय/पर्यवेक्षक पद (मुख्य रूप से प्रबंधन का काम और वेतन ₹18,000+*): फ़ैक्टरी अधिनियम में “worker” नहीं माने जाते।
- कुछ राज्यों ने IT/ITES और स्टार्टअप को दुकान-प्रतिष्ठान अधिनियम के घंटे-नियमों से छूट दी है*।
- सेल्स/फ़ील्ड कर्मचारी जिनके घंटे तय नहीं: अनुबंध पर निर्भर।
- सरकारी कर्मचारी: विभागीय नियम (रेलवे में अलग OT सूत्र)।
ओवरटाइम: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ओवरटाइम की गणना कैसे होती है? मासिक वेतन (बेसिक+DA) ÷ 26 ÷ 8 = घंटे की दर; ओवरटाइम उसका दोगुना × घंटे। ₹26,000 पर ₹250/घंटा, 10 घंटे = ₹2,500।
ओवरटाइम कितने घंटे के बाद लगता है? दिन में 9 घंटे या हफ़्ते में 48 घंटे से ज़्यादा काम पर (कुछ राज्यों में 8 घंटे/दिन)। रोज़ के घंटे ब्रेक मिलाकर 10.5 से ज़्यादा नहीं हो सकते।
क्या ओवरटाइम सिंगल रेट पर देना क़ानूनी है? नहीं। फ़ैक्टरी अधिनियम धारा 59 और OSH कोड धारा 27 में दोगुनी दर अनिवार्य है। कम देने पर श्रम निरीक्षक के पास शिकायत और बकाया की वसूली हो सकती है।
एक तिमाही में कितना ओवरटाइम हो सकता है? OSH कोड के मसौदा केंद्रीय नियमों में 125 घंटे प्रति तिमाही (पुराने फ़ैक्टरी नियमों में 50-75)। राज्य अपनी सीमा तय करते हैं।
क्या ओवरटाइम पर PF/ESI कटता है? PF में ओवरटाइम भत्ता शामिल नहीं होता; ESI अंशदान में ओवरटाइम शामिल है पर ₹21,000 की सीमा तय करने में नहीं गिना जाता*।
ऑफ़िस/दुकान के कर्मचारी को ओवरटाइम मिलता है? हाँ, राज्य के दुकान-प्रतिष्ठान अधिनियम में 48 घंटे/हफ़्ते से ऊपर दोगुना (ज़्यादातर राज्य)। प्रबंधकीय पद और कुछ राज्यों में IT कंपनियों को छूट।
ओवरटाइम न मिले तो कहाँ शिकायत करें? हाज़िरी/पर्ची का रिकॉर्ड रखकर लिखित माँग दें; फिर ज़िला श्रम कार्यालय, फ़ैक्टरी निरीक्षक या समाधान पोर्टल। वेतन कोड में दावा 3 साल तक।
स्रोत (14 अक्टूबर 2026 को जाँचे): फ़ैक्टरी अधिनियम 1948 धारा 51, 54, 59; OSH कोड 2020 धारा 25-27 और मसौदा केंद्रीय नियम (125 घंटे); asanify, patron accounting, india-briefing, keka, outlook business, incorpx के 2026 गाइड; राज्यों के दुकान-प्रतिष्ठान अधिनियम। * वाली बातें माध्यमिक स्रोतों से। यह अनुमान है, कानूनी राय नहीं।
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